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‘ईमानदार गलती’ के लिए कोर्ट ने एडिटर को किया दोषमुक्त

Published At: Monday, 21 January, 2019 Last Modified: Monday, 21 January, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

‘बीबीसी एशियन नेटवर्क’ (BBC Asian Network) के एडिटर आरिफ अंसारी को अदालत से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें दुष्कर्म पीड़िता का नाम उजागर करने के मामले में दोषी नहीं पाया है।

आरोप है कि बीबीसी ने लाइव रेडियो ब्रॉडकास्ट में यौन दुर्व्यवहार शिकार महिला का नाम उजागर कर दिया था। यूके में यौन अपराध पीड़ितों का नाम जीवनभर गुप्त रखा जाता है। लिहाजा, जब लाइव ब्रॉडकास्ट में पीड़िता ने अपना नाम सुना तो यह मामला अदालत की चौखट तक जा पहुंचा। माना जा रहा था कि अदालत कोई सख्त फैसला सुना सकती है, लेकिन अदालत ने प्रसारण को एक ‘ईमानदार गलती’ करार देते हुए आरिफ अंसारी को दोषमुक्त कर दिया।

यह मामला इंग्लैंड के शहर रॉदरहैम के चर्चित दुष्कर्म कांड से जुड़ा है। हालांकि, जिस स्टोरी को लेकर अंसारी को अदालत में पेश होना पड़ा, वो उन्होंने नहीं लिखी थी। एक अन्य रिपोर्टर ने स्क्रिप्ट तैयार की थी। जब स्क्रिप्ट अंसारी के पास जांचने के लिए आई तो उन्होंने यह सोचकर नाम पर आपत्ति नहीं उठाई कि यह छद्म नाम होगा। आमतौर पर मीडिया पीड़िता को एक छद्म नाम दे देता है, ताकि स्टोरी समझने और समझाने में आसानी हो।

पिछले साल मामला उजागर होने के बाद अदालत में अंसारी को अभियुक्त बनाया गया था। उनपर यौन अपराध कानून 1992 के उल्लंघन के आरोप लगे। अभियोजन पक्ष की दलील थी कि अंसारी पूरी स्थिति से वाकिफ थे, उन्हें पता था कि वरिष्ठ पत्रकार रिकिन मजीठिया ने कोर्ट रिपोर्टिंग नहीं की है। उन्हें इसका कोई अनुभव नहीं था। एडिटोरियल हेड होने के नाते प्रसारण के लिए वह भी ज़िम्मेदार हैं।

मामले की शुरुआत तब हुई, जब अंसारी के कहने पर वरिष्ठ पत्रकार रिकिन मजीठिया रॉदरहैम यौन शोषण कांड से जुड़े एक मुकदमे में सबूतों को सुनने के लिए शेफ़ील्ड क्राउन कोर्ट गए, वहां पीड़िता का असली नाम इस्तेमाल किया गया। बाद में अपनी स्क्रिप्ट तैयार करते हुए रिकिन ने वही नाम उपयोग में लिया और इस तरह अनजाने में महिला का असली नाम उजागर हो गया। ताज्जुब की बात यह है कि रिकिन भी यही समझ रहे थे कि जिस नाम का इस्तेमाल वह कर रहे हैं, वो पीड़िता का असली नाम नहीं है।

अदालत के फैसले पर संतोष जाहित करते हुए अंसारी ने कहा ‘मैंने उनकी पत्रकारिता पर भरोसा किया, वह एक अच्छे पत्रकार हैं। यह कोई क़ानूनी मसला नहीं था। उन्हें एक सामान्य बात याद रखनी थी, जो हमें पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान बताई जाती है। रिकिन वरिष्ठ पत्रकार हैं, लिहाजा जो स्क्रिप्ट उन्होंने मुझे भेजी, वो मुझे  सही लगी। मैं तो पीड़िता को जानता भी नहीं हूं। जब प्रसारण ऑन-एयर हुआ, मैं उस वक़्त लंदन में था’। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने इसे एक ‘ऑनेस्ट मिस्टेक’ मानते हुए आरिफ अंसारी को दोषमुक्त कर दिया।



पोल

पुलवामा में आतंकी हमले के बाद हुई मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर क्या है आपका मानना?

कुछ मीडिया संस्थानों ने मनमानी रिपोर्टिंग कर बेवजह तनाव फैलाने का काम किया

ऐसे माहौल में मीडिया की इस तरह की प्रतिक्रिया स्वाभाविक है और यह गलत नहीं है

भारतीय मीडिया ने समझदारी का परिचय दिया और इसकी रिपोर्टिंग एकदम संतुलित थी

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