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BBC पर ये 'गंभीर' आरोप लगाते हुए महिला संपादक ने दिया इस्तीफा...

Monday, 08 January, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।


बीबीसी से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां चीन की संपादक कैरी ग्रेसी ने संस्था को 'असमान वेतन' के चलते अलविदा कह दिया है। उनका कहना है कि बीबीसी में महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले कम वेतन दिया जाता है।


बता दें कि ग्रेसी 30 साल से बीबीसी में कार्यरत हैं। ग्रेसी ने एक खुले पत्र में कंपनी पर 'गुप्त और गैरकानूनी वेतन स्ट्रक्चरके आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि डेढ़ लाख ब्रितानी पाउंड से अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों में दो-तिहाई पुरुष शामिल हैं। यह जानकारी सामने आने के बाद से ही बीबीसी के विश्वास की डोर अब कमजोर होने लगी है

हालांकि बीबीसी ने अपने बयान में कहा कि संस्थान में महिलाओं के खिलाफ कोई भेदभाव नहीं किया गया है।

फिलहाल ग्रेसी की मानें तो उन्होंने बीबीसी में चीन की संपादक के तौर पर बीते सप्ताह ही इस्तीफा दे दिया है, लेकिन वे संस्थान के साथ बनी रहेंगी। उन्होंने कहा कि वे टीवी न्यूजरूम में अपनी पूर्व भूमिका में लौट रही हैं, जहां उन्हें उम्मीद है कि वेतन पुरुषों के बराबर मिलेगा।

उन्होंने अपने खुले पत्र में लिखा कि, ‘बीबीसी लोगों की सेवा है जो लाइसेंस फीस चुकाते हैं।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘मैं मानती हूं कि आपको ये जानने का अधिकार है कि बीबीसी बराबरी के कानून को तोड़ रही है और पारदर्शी व निष्पक्ष वेतन स्ट्रक्चर के लिए डाले जा रहे दबाव को रोक रही है।

ग्रेसी ने लिखा कि वे ये जानकर हैरान हैं कि बीबीसी में अंतरराष्ट्रीय संपादक महिलाओं के मुकाबले दो पुरुष कम से कम पचास फीसदी अधिक वेतन ले रहे हैं, जिनमें बीबीसी अमेरिका के संपादक जोन सोपेल और बीबीसी मध्यपूर्व के संपादक जेरेमी बावेन का नाम शामिल हैं। जोन सोपेल को दो से ढाई लाख पाउंड और जेरेमी बावेन को डेढ़ से दो लाख पाउंड के बीच वेतन मिलता है।

गौरतलब है कि बीबीसी को बीते साल जुलाई महीने में सालाना डेढ़ लाख पाउंड से अधिक कमाने वाले सभी कर्मचारियों का वेतन सार्वजनिक करना पड़ा था, जिसके बाद अब ये मामला सामने आया है। हालांकि कैरी ग्रेसी इस सूची में नहीं थीं,  क्यों कि उनका वेतन डेढ़ लाख पाउंड सालाना से कम था।

अपने पत्र में ग्रेसी ने ये भी लिखा कि वे वेतनवृद्धि नहीं चाहती, बल्कि बराबर वेतन चाहती हैं। 

हालांकि ग्रेसी का इस्तीफा बीबीसी के लिए सिरदर्द बना हुआ है और यह कहा बीबीसी के मीडिया संपादक अमोल राजन ने। राजन के मुताबिक, बीबीसी ने जहां वेतन में बराबरी लाने का वादा किया है वहीं ग्रेसी का पत्र दर्शाता है कि ये वादा खोखला था।

ट्विटर पर बीबीसी के पत्रकारों समेत कई लोगों ने कैरी ग्रेसी का समर्थन किया है।

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