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#MeToo पर HC सख्त, मीडिया से न करें बात

Published At: Friday, 12 October, 2018 Last Modified: Friday, 12 October, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 

देश में चल रहे #MeToo कैंपेन के बीच इससे जुड़ा एक मामला गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया, जिसके बाद इसे लेकर हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले की जानकारी सोशल मीडिया पर लिखने से मना किया है।

गौरतलब है कि एक महिला पत्रकार द्वारा यौन आरोपों का सामना कर रहे एक आरोपी ने हाई कोर्ट से गुहार लगाई कि अभियोक्ता को सोशल मीडिया या अन्य मंचों पर अपने अनुभव साझा कर आरोप लगाने से रोका जाए।

याचिकाकर्त्ताओं के अनुरोध पर हाई कोर्ट ने अहम आदेश देते हुए कहा कि आरोप लगाने वाला और आरोपों का सामना करने वाला दोनों में से कोई भी सोशल मीडिया पर एक दूसरे की पहचान उजागर न करें।

दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस वीके राव की एक पीठ ने ये भी आदेश दिया कि दोनों पक्ष मीडिया में एक दूसरे के खिलाफ कोई भी इंटरव्यू नहीं देंगे। मीडिया पर बैन के अलावा किसी भी थर्ड पार्टी को सोशल मीडिया पर दोनों से जुड़ी कोई भी जानकारी या अपने नजरिए से कुछ भी नहीं डालेंगे।

बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने ये आदेश एक यौन उत्पीड़न के एक आरोपी की याचिका पर दिया है। वेब पोर्टल में काम करने वाली एक महिला पत्रकार ने अपने वरिष्ठ पत्रकारों पर पिछले साल यौन शोषण का आरोप लगाया था। कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में महिला को आरोपियों की पहचान उजागर न करने का आदेश दिया था।

दरअसल इस मामले में पीड़ित एक महिला पत्रकार है और उसने आरोप लगाया है कि ऑनलाइन पोर्टल में काम करने के दौरान उसके बॉस ने उसका शारीरिक शोषण किया। महिला पत्रकार का यह भी दावा है जब इसकी शिकायत उसने ऑफिस की शिकायत कमेटी को की, तो उसकी शिकायत पर जांच करने के बजाय उसकी शिकायत को ही कमेटी ने खारिज कर दिया गया, जब उसकी शिकायत पर दफ्तर में कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पिछले साल उसने इस मामले में हाई कोर्ट का रुख किया।

बता दें कि उसके इस मामले में हुई पिछली कुछ सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की तरफ से आदेश दिया गया था कि मामले से जुड़े सभी व्यक्तियों की पहचान को सार्वजनिक न  की जाए, जब तक कि केस का फैसला नहीं हो जाता।लेकिन इस मामले में आरोपी का कहना है कि हाल ही में #MeToo कैंपेन के दौरान फेसबुक से लेकर ट्विटर पर पीड़ित महिला पत्रकार ने सभी आरोपियों के नाम सार्वजनिक कर दिए जिसके बाद आरोपियों ने हाई कोर्ट का रुख किया।



 



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