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HT ने मानक गुप्ता को कहा ‘ट्रोल’, पत्रकारों ने अखबार की विश्वसनीयता पर दागे सवाल...

Published At: Friday, 06 July, 2018 Last Modified: Friday, 06 July, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

मीडिया में आने वाली एक गलत खबर किसी की जिंदगी खत्म या खराब कर सकती है। ज्यादा नहीं तो कम से कम उसकी छवि नकारात्मक रूप से प्रभावित तो कर ही सकती है और आज के सोशल मीडिया के दौर में ये और भी ज्यादा आसान हो गया है। यही वजह है कि पत्रकारिता की पाठशाला से निकलने वाले हर शख्स को बार-बार ये समझाया जाता है कि बिना असलियत जाने आरोप लगाने से बचें, लेकिन इस बचेंको पत्रकार अपने शब्दकोष से निकालते जा रहे हैं। कम से कम अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स की उस खबर को देखकर तो यही लगता है, जिसमें उसने न्यूज24’ चैनल के पत्रकार मानक गुप्ता पर भी ट्रोल होने का तमगा लगा डाला।



रअसल, सारा विवाद लखनऊ के हिंदू-मुस्लिम कपल के पासपोर्ट को लेकर शुरू हुआ। तन्वी सेठ द्वारा पासपोर्ट अधिकारी पर लगाए गए धर्म संबंधी टिप्पणी के आरोप के बाद जब विदेशमंत्री सुषमा स्वराज सक्रिय हुईं, तो सोशल मीडिया पर ट्रोल भी सक्रिय हो गए। उनके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। खबर बड़ी, थी इसलिए मीडिया संस्थान अपने-अपने विश्लेषण में जुट गए। इसी दौरान, 26 जून को हिन्दुस्तान टाइम्स ने पेज नंबर-15 पर एक विश्लेषणात्मक स्टोरी प्रकाशित की।



‘41 भाजपा सांसद, जो सुषमा स्वराज को ट्रोल करने वालों को फॉलो करते हैंइस शीर्षक तले, अखबार ने कुछ कथित ट्रोलके नाम भी दिए। इस सूची में सातवें नंबर पर पत्रकार मानक गुप्ता का नाम था। अखबार ने ये भी बताया कि कथित ट्रोलर गुप्ता को 9 भाजपा सांसद फॉलो करते हैं।


मानक अपनी बेवाकी के लिए जाने जाते हैं, उनके ट्वीट या विचारों में किसी खास पार्टी के लिए झुकाव नजर नहीं आता और न ही वो किसी पर व्यक्तिगत हमले करने में विश्वास रखते हैं। वो महज सवाल उठाते हैं और उसके जवाब में एक नया सवाल खोजकर सामने रख देते हैं। यही वजह है कि अलग-अलग दलों की विचारधारा से प्रभावित लोग उन्हें किसी न किसी दल से जोड़ते रहते हैं। इसलिए हिन्दुस्तान टाइम्स ने भी उन्हें उस टीम का हिस्सा समझ लिया, जिसका काम सोशल मीडिया पर लोगों के व्यक्तिगत विचारों में घुसपैठ करके उन्हें देश और समाज का सबसे बड़ा दुश्मन करार देना है।


एक प्रतिष्ठित अखबार में इस तरह की खबर पर प्रतिक्रिया होना लाजमी था और हुआ भी। सोशल मीडिया पर मानक गुप्ता को ट्रोल किया जाने लगा। मानक को जब इस ट्रोलिंग की वजह पता चली तो वो खुद सन्न रह गए। उन्होंने अखबार की खबर पर कड़ा विरोध जताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।


उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, ‘आपने मुझे ट्रोल कहा! अब आपसे कोर्ट में मुलाकात होगी। मैंने सुषमा स्वराज के ट्वीट अभी देखे हैं, उन्होंने मेरे किसी ट्वीट को लाइक नहीं किया है, अब आप मेरे जवाब का इंतजार करें।


दरअसल, हिन्दुस्तान टाइम्स ने अपनी स्टोरी में लाइकके विषय में लिखा था कि सुषमा स्वराज ने दुनिया को यह बताने के लिए कि उन्हें सोशल मीडिया पर क्या-क्या देखना पड़ रहा है उन 200 ट्वीट्स को लाइक किया है, जिनमें उन्हें किसी न किसी तरह निशाना बनाया गया है। अखबार की इस खबर का कई पत्रकारों ने विरोध किया, जिसमें टीवी जर्नलिस्ट रुबिका लियाकत भी शामिल हैं। रुबिका ने मानक के ट्वीट पर अपने कमेंट में हिन्दुस्तान टाइम्स को उनसे माफी मांगने की नसीहत भी दे डाली।


उन्होंने लिखा कि यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है, फैक्ट चेकिंग भी कोई चीज होती है। सवाल पूछना ट्रोलिंग कब से बन गया? इस खबर के लिए आपको मानक जैसे विश्वसनीय पत्रकार से माफ़ी मांगनी चाहिए।


रुबिका के साथ ही मानक को मीडिया आन्ट्रप्रनर अनुराधा प्रसाद का भी साथ मिला। उन्होंने एचटी की खबर पर आपत्ति जताते हुए अपने ट्वीट में कहा कि मानक वही कर रहे हैं, जो एक पत्रकार को करना चाहिए...सवाल पूछना। लिहाजा उन्हें ट्रोल कहना स्वीकार्य नहीं है। इसी तरह आजतक के पत्रकार आशुतोष मिश्रा ने भी अखबार पर निशाना साधा। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा हिन्दुस्तान टाइम्स खुद को अखबार कहना छोड़ दे। गलत सही का फैसला बाद में करें लेकिन यह तो तय कर लेते कि ट्रोल्स में आपने जिनका नाम लिखा उनका बायो तक चेक नहीं किया। पत्रकार कटाक्ष और आलोचना करता है ट्रोल नहीं। माफी से कम मंजूर कुछ नहीं


एबीपी न्यूज के वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा ने तो इसे आपराधिक तक करार दिया। वहीं, अपने तीखे सवालों के लिए पहचानी जाने वालीं पत्रकार श्वेता सिंह ने अपने चिरपरचित अंदाज में हिन्दुस्तान टाइम्स को ताना मारा। उन्होंने कहा, ‘मैंने इजरायल के मुद्दे पर पीएम की आलोचना की थी। रमजान सीजफायर पर गृहमंत्री और रक्षामंत्री की। कश्मीर वाले बयान पर गुलाम नबी की। पासपोर्ट कांड पर विदेश मंत्री की। समझ नहीं आ रहा। मैं Right Wing ट्रोल हूं या ‘Wrong’ wing!


सुषमा स्वराज को ट्रोल करने से लेकर उठे इस विवाद ने जब नया मोड़ ले लिया, तो संभवत: अखबार प्रबंधन को अपनी गलती का अहसास हुआ। अखबार के 2 जुलाई के अंक में मानक गुप्ता का लेख प्रकाशित किया गया, जिसके माध्यम से एक तरह से यह समझाने को कोशिश की गई कि जो हुआ, भूलवश हुआ।


अपने इस आर्टिकल में मानक ने सुषमा स्वराज को ट्रोल करने वालों को न सिर्फ आड़े हाथों लिया बल्कि यह भी साफ कर दिया कि जिन ट्वीट को लेकर उन्हें ट्रोलकी सूची में डाला गया, वो ट्रोलिंग नहीं सवाल थे।


दरअसल, जब तन्वी सेठ को आनन-फानन में पासपोर्ट इशू किया गया था, तो मानक ने अपने ट्वीट के जरिए आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि नियमों को परे रखकर इतनी जल्दबाजी क्यों? हिन्दुस्तान टाइम्स उनके ऐसे ही कुछ ट्वीट को ट्रोलिंगसमझ बैठा। मानक ने अपने लेख के अंत में लिखा है, ‘लोकतंत्र में स्वस्थ विरोध स्वीकार्य है, लेकिन कभी-कभी लोग इसका गलत मतलब निकाल लेते हैं। उन्होंने आगे कहा है कि ट्रोलके जवाब में जब विदेश मंत्री और उनकी टीम ने ट्रोलिंग ट्वीट को लाइक करने का फैसला लिया, तो उन्होंने ट्रोलिंगऔर पत्रकारिताके अंतर को नजरंदाज कर दिया। मेरे भी कुछ ट्वीट लाइक किए गए, जबकि मैं केवल नियमों के उल्लंघन पर सवाल उठा रहे था। दुर्भाग्यवश, हिन्दुस्तान टाइम्स ने उन्हीं ट्वीट को उठा लिया, लेकिन किसी ने यह जानने का प्रयास नहीं किया कि क्या मेरे ट्वीट में किसी तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया है या नहीं। न ही ये देखने का प्रयास किया गया कि सुषमा स्वराज और उनकी टीम द्वारा मेरे ट्वीट को बाद में अनलाइक किया गया है नहीं

हिन्दुस्तान टाइम्स की इस अप्रत्याशित माफी के बाद मामला भले ही ठंडा पड़ गया हो, लेकिन अखबार की विश्वसनीयता पर सवाल जरूर खड़े हुए हैं। बात चाहे मानक जैसे किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति की हो या सामान्य इन्सान की। गलत और भ्रामक खबरें नुकसान पहुंचाती ही हैं, लिहाजा मीडिया को बचेंके सिद्धांत को आत्मसात करना ही चाहिए।   

 

 

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