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सरकारी नीतियों के खिलाफ लिखने वाले इस संपादक को भेजा जेल

Thursday, 12 July, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।


केवल पड़ोसी चीन ही एकमात्र ऐसा देश नहीं है, जहां मीडिया की आवाज को दबाया जाता है। अजरबैजान में भी पत्रकारों को प्रताड़ित किया जा रहा है। सरकार या स्थानीय प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले पत्रकारों को किसी न किसी आरोप के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है।


7 जुलाई को न्यूज वेबसाइट अजेल के संस्थापक और मुख्य संपादक अफगान सद्यगोव को पुलिस ने गिरफ्तार किया और अदालत ने प्रशासनिक अपराध के लिए उन्हें 30 दिन जेल की सजा सुनाई। सद्यगोव सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल उठा रहे थे, उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर हाल में फेसबुक पर कुछ पोस्ट भी लिखे थे। इन्हीं पोस्ट को उनकी गिरफ्तारी का आधार बताया गया है।


गौर करने वाली बात ये है कि सद्यगोव को जेल भेजे जाने के नाम पर कहां रखा गया है इसकी किसी को जानकारी नहीं है। संपादक की पत्नी सेविनच सद्यगोव ने अब कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट (सीपीजे) से मदद की गुहार लगाई है। सीपीजे एक अमेरिकी संस्था है, जो पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम करती है।


सेविनच ने सीपीजे को बताया है कि अदालत ने उनके पति को बाकू डिटेन्शन सेंटर में रहने का आदेश दिया था, लेकिन वो वहां नहीं हैं। सेविनच और उनके वकील जावेद जावादोव जब अफगान से मिलने के लिए बाकू डिटेन्शन सेंटर पहुंचे, तो अधिकारियों ने कहा कि उन्हें यहां नहीं लाया गया है। जबकि कोर्ट ऑर्डर में भी इस बात का जिक्र है कि अफगान को बाकू डिटेन्शन सेंटर में बतौर सजा 30 दिनों रखा जाए, क्योंकि प्रशासनिक अपराध के दोषियों को यहीं रखा जाता है।


संपादक अफगान सद्यगोव की पत्नी के मुताबिक, उनकी गिरफ्तारी 6 जुलाई को उस समय हुई जब वो अपनी मां से मिलने जा रहे थे, लेकिन कोर्ट पेपर दिखाते हैं कि पुलिस ने उन्हें 7 जुलाई को गिरफ्तार किया। 


अफगान सद्यगोव को 2016 में भी मारपीट के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस वक्त अदालत ने उन्हें ढाई साल की सजा सुनाई थी। हालांकि सीपीजे ने पाया था कि अफगान ने स्थानीय अधिकारियों के कथित भ्रष्टाचार को उजागर किया था, जिसके चलते उन्हें मारपीट के आरोपों के तहत जेल भेजा गया। अफगान इसी साल 23 मई को रिहा हुआ थे। रिहाई के छह सप्ताह के भीतर ही उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। 


दरअसल, अफगान सद्यगोव ने जेल से बाहर आने के बाद सरकारी नीतियों और कार्यप्रणाली पर दोबारा चोट करना शुरू कर दिया था। इसके अलावा उन्होंने जेल के बदतर हालातों पर भी कुछ पोस्ट किए थे। साथ ही उन्होंने कुछ सामाजिक मुद्दों से जुड़े विडियो फेसबुक पर पोस्ट करके सरकार से सवाल किया था कि हमारी जिंदगी इतनी कठिन क्यों है? प्रशासन ने अफगान के फेसबुक पेज को भी ब्लॉक कर दिया है।  


कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट (सीपीजे) ने अजरबैजानी अधिकारियों की इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए स्वतंत्र पत्रकार अफगान सद्यगोव की रिहाई की मांग की है। सीपीजे का कहना है कि बिना कानूनी सहायता उपलब्ध कराए इस तरह से पत्रकार को ले जाना और उसके परिवार और वकील को उससे मिलने न देना महज मानवाधिकारों का उल्लंघन ही नहीं है, बल्कि ये अजरबैजान सरकार पर एक और दाग है। सीपीजे ने प्रशासन से अफगान को तुरंत छोड़ने और स्वतंत्र पत्रकारों का उत्पीड़न बंद करने को कहा है।       

  

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