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मुझे मेरे नाम का पूरा अर्थ बताया था अटल जी ने: अभिज्ञान प्रकाश

Published At: Thursday, 16 August, 2018 Last Modified: Thursday, 16 August, 2018

अभिज्ञान प्रकाश

कंसल्टिंग एडिटर, एनडीटीवी समूह ।।


देश के पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए एनडीटीवी समूह के कं‍सल्टिंग एडिटर अभिज्ञान प्रकाश काफी भावुक होते हुए कहते हैं कि मेरी मां के बाद अपने नजरिये से मेरे नाम का पूरा अर्थ मुझे अटल जी ने ही समझाया था। उन्‍होंने बताया था कि अभिज्ञान का मतलब होता है पहचान और यही वजह है कि पुराने समय में विश्‍वविद्यधलयों में आईकार्ड को अभिज्ञान पत्र कहा जाता था। संस्‍कृत और पाली भाषा में अभिज्ञान को अभिक्षनान बोला जाता है। मेरे नाम का विश्‍लेषण करते हुए अटल जी ने बताया था कि कालिदास ने अपनी प्रसिद्ध कृति का नाम 'अभिज्ञान शाकुंतलम' क्‍यों रखा। इसके पीछे की वजह ये थी कि शकुंतला दुष्‍यंत का प्‍यार थी और इस प्‍यार की पहचान उनका बेटा भरत था, जिसके नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा। इसलिए, शकुंतला की पहचान बताने वाली कृति का नाम अभिज्ञान शाकुंतलम रखा गया। 

अभिज्ञान का कहना है कि अटल जी को घूमने का काफी शौक था। छुट्टियों में जब भी वह मनाली जाते थे तो मैं भी उनके साथ जाता था। इसके अलावा अटल जी के प्रधानमंत्री रहते हुए मैंने उनके साथ काफी विदेश यात्राएं भी की हैं। मैं पहला पत्रकार था जिसने पोखरण की खबर ब्रेक की थी। इस मामले को लेकर जब पहली प्रेस कॉंफ्रेंस की गई थी तो अटल जी ने मजाक में कहा भी था कि आपके पास तो सारी खबरें पहले ही आ जाती हैं। जब भी कभी अटल जी मूड में होते थे तो मुझे अभिज्ञान शाकुंतलम कहकर बुलाते थे। आज राजनीतिक दलों में जिस तरह का वीआईपी कल्‍चर है, वे इसके सख्‍त खिलाफ थे। जिस तरह आज नेताओं से मिलना मुश्किल है, वैसा अटल जी के समय में कभी नहीं रहा। उनसे आराम से मुलाकात हो जाती थी। मुझे अभी भी याद है कि एक बार गलती से अटल जी के सुरक्षाकर्मी का पैर हमारे कैमरामैन के पैर आपस में टकरा गए थे। सुरक्षाकर्मी के कुछ कहने पर अटल जी ने उसे काफी डांटा था। उन्‍होंने कहा था कि भीड़ और धक्‍कामुक्‍की में तो ऐसा हो जाता है। जबकि यदि इस तरह का वाक्‍या आजकल के नेताओं के साथ होता तो मुझे नहीं लगता कि वे अपने सुरक्षाकर्मी को डांटते। यही थी अटल जी की खूबी।

आज के माहौल में जहां पर राजनेता अपना विरोध सुनने के लिए तैयार नहीं हैं लेकिन अटल जी की खासियत थी कि वे अपने विरोधियों और आलोचकों के काफी करीब थे। मुझे अभी भी याद है कि आगरा में वार्ता विफल होने के बाद भी उन्‍होंने कभी उम्‍मीद नहीं छोड़ी।

अटल जी स्‍वभाव से काफी सरल थे और कई बातों को हंसते-हंसते कह देते थे। मुझे याद है कि एक बार मुंबई में शिवसेना और भाजपा नेताओं की बैठक होनी थी। उस समय कुशभाऊ ठाकरे भाजपा के अध्‍यक्ष हुआ करते थे। जब सभी लोग मुंबई में कमरे में दाखिल हुए तो अटल जी ने मजाकिया लहजे में कहा कि आपके पास यदि बाल ठाकरे हैं तो हमारे पास 'बिना बाल ठाकरे' हैं। सोनिया गांधी जब राजनीति में उतरीं और कांग्रेस को सत्‍ता में लाईं तो भी कभी उन्‍होंने सोनिया गांधी पर निजी हमले नहीं किए। अटल जी की खासियत थी कि वह अपने विरोधियों पर राजनीतिक हमले भले ही करते हों लेकिन निजी हमला कभी नहीं किया।

इस बात को तो सारी दुनिया जानती है कि गुजरात के दंगों के बाद कैसे उन्‍होंने नरेंद्र मोदी से राजधर्म का पालन करने को कहा था। मेरी नजर में अटल जी बहुत विशाल शख्सियत थे। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के लिए उनका गुणगान करना अच्‍छी बात है लेकिन उन्‍हें अटल जी से कुछ सीख भी लेनी चाहिए।

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