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'इतने बडे देश में सिर्फ 8 लोग फेक न्‍यूज से जुडे मुद्दों को हैंडल कर रहे हैं'

Thursday, 04 January, 2018

निशांत सक्सेना ।।

देश में इन दिनों फेक न्‍यूज (fake news) को लेकर काफी बहस हो रही है। कई लोग सोशल मीडिया पर फेक न्‍यूज को बेचकर काफी मुनाफा कमा रहे हैं। यानी ऐसे लोगों का न्‍यूज की विश्‍वसनीयता से कोई लेना-देना नहीं हैं। हालांकि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस तरह के फर्जी लोगों को बेनकाब कर सच से पर्दा उठाने में जुटे हुए हैं। इन्‍हीं में से एक नाम Fact-checking website यानी तथ्‍यों की जांच पड़ताल करने वाली वेबसाइट ‘Alt News’ के सह संस्‍थापक प्रतीक सिन्‍हा का लिया जा सकता है, जो फेक न्‍यूज के खिलाफ ऑनलाइन लड़ाई लड़ रहे हैं।

हमारी सहयोगी ‘एक्‍सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) के निशांत सक्सेना ने प्रतीक सिन्‍हा से विभिन्‍न मुद्दों पर बातचीत की। प्रस्‍तुत हैं इसके प्रमुख अंश:  

यह पूछे जाने पर कि नौ फरवरी 2017 को लॉन्चिंग के बाद से ‘Alt News’ काफी तेजी से आगे बढ़ रही है, आखिर इसका राज क्‍या है, जिस पर प्रतीक सिन्‍हा का कहना था, ‘इसका अर्थ ये हो सकता है कि हमने शायद ज्‍यादा विस्‍तार से स्‍टोरीज की हैं और इनमें सरकार की काफी आलोचना भी की गई थी। दरअसल, आजकल लोगों को सही और भरोसेमंद न्‍यूज नहीं मिल पा रही हैं। यही कारण है कि जब हमने इस पर काम किया तो हम पर मीडिया ने काफी ध्‍यान दिया। इसमें आश्‍चर्य करने वाली कोई बात नहीं है।’

प्रतीक सिन्‍हा के अनुसार, ‘हमारी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फेसबुक पर हमारे प्‍लेटफॉर्म के 65000 से ज्‍यादा प्रशंसक हैं, इसके अलावा ट्विटर पर करीब 40 हजार फॉलोअर्स और यूट्यूब पर 6000 से ज्‍यादा सबस्‍क्राइबर्स हैं।’ 

फैक्‍ट चेकिंग वेबसाइट्स के भविष्‍य के बारे में पूछे जाने पर प्रतीक सिन्‍हा का कहना था कि फेक न्‍यूज आजकल एक बड़ा मुद्दा बन चुका है और इससे निपटने के लिए बड़े संस्‍थानों और मेनस्‍ट्रीम मीडिया को आगे आकर सहयोग करने की जरूरत है। उन्‍होंने बताया कि देश में इस समय दो अन्‍य बडे प्‍लेटफॉर्म भी हैं, जो फेक न्‍यूज से टक्‍कर ले रहे हैं। ये हैं- ‘SM Hoax Slayer’ और ‘Boom Live’। सिन्‍हा का यह भी कहना था कि देश में 1.3 बिलियन लोग हैं, जिनमें से कुल आठ लोग फेक न्‍यूज से जुडे मुद्दों को हैंडल कर रहे हैं।

जुलाई में सिंगापुर में हुई ‘गूगल न्‍यूज लैब एशिया-पैसिफिक समिट 2017’ में कुछ मीडिया एंटरप्रिन्‍योर्स को आमंत्रित किया गया था, जिनमें प्रतीक सिन्‍हा का नाम भी शामिल था।इस बारे में सिन्‍हा का कहना था, ‘हमें इस समिट में हॉन्‍गकॉन्‍ग में काम कर रहे मॉडल के बारे जानने का मौका मिला। इसमें न्‍यूजरूम के बीच में चार फैक्‍ट चेकर्स बैठते हैं और लगातार ब्रेकिंग न्‍यूज के सभी फैक्‍ट्स को चेक करते रहते हैं।’ 

सिन्‍हा का कहना है, ‘फैक्‍ट चेकिंग को पत्रकारिता का एक अहम हिस्‍सा बनाना होगा। इसमें बहुत संभावनाएं हैं और एक पत्रकार ही इसके फैक्‍ट की जांच कर सकता है। ऐसे कई उदाहरण हैं जिनमें ‘Alt News’ ने मेनस्‍ट्रीम मीडिया को ऐसी न्‍यूज परोसते हुए पकड़ा है, जो तथ्‍यहीन थी। इसको बदलने की जरूरत है। आखिर ऐसे लोगों को एक टीम की जरूरत है जो फैक्‍ट चेक करती रहे।’

पाठकों तक ‘Alt News’ की पहुंच बढाने के लिए प्रतीक सिन्‍हा ने इसका हिन्‍दी वर्जन भी लॉन्‍च किया है। इस बारे में प्रतीक सिन्‍हा का कहना था, ‘मुझे बड़ी खुशी होगी कि मेनस्‍ट्रीम मीडिया में फैक्‍ट चेकिंग की जरूरत न हो, लेकिन सोशल मीडिया में फैक्‍ट चेकिंग हमेशा रहेगी और इसके लिए Alt News जैसी स्‍वतंत्र इकाई वहां मौजूद रहेंगी।’

फैक्‍ट चेकिंग के बारे में प्रतीक सिन्‍हा का कहना था, ‘फैक्‍ट चेंकिग में सिर्फ यह देखना होता है कि कौन सी न्‍यूज गलत है अथवा सही है। कोई भी व्‍यक्ति फैक्‍ट चेकर्स हो सकता है। लोगों ने तो फैक्‍ट चेकिंग का काम शुरू भी कर दिया है।’

फैक्‍ट चेकर्स क्‍या राजनीति से प्रेरित नहीं हो सकता, इस बारे में सिन्‍हा का कहना था, हो सकता है कि कुछ लोग राजनीति से प्रेरित हों, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि आप गलत हो। वैसे तो सभी लोगों को अपनी जिम्‍मेदारी समझनी होगी। जब लोग पूर्वाग्रह के बारे में बात करने लगेंगे तो फैक्‍ट चेकर की विश्‍वसनीयता घटने लगेगी, हम सभी इन बातों का ध्‍यान रखते हैं लेकिन पूर्वाग्रह की आप झूठे तथ्‍यों से तुलना नहीं कर सकते हैं। ये दोनों अलग चीजें हैं।

नवंबर 2017  से वेबसाइट ने अपने निष्पक्ष संचालन के लिए डोनेशन लेना भी शुरू कर दिया है। अगर आप भी वेबसाइट को सहयोग देना चाहते हैं, तो निम्न लिंक के जरिए अपनी मदद कर सकते हैं...

https://www.instamojo.com/@altnews


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क्या इंडिया टीवी के चेयरमैन रजत शर्मा का क्रिकेट की दुनिया में जाना सही है?

हां, उम्मीद है कि वे वहां भी उल्लेखनीय कार्य कर सुधार करेंगे

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