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कैसे बड़ी टीवी जर्नलिस्ट के NDTV में बॉस बनने के अरमानों पर फिरा पानी !

Published At: Wednesday, 01 November, 2017 Last Modified: Wednesday, 01 November, 2017

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

अगर एनडीटीवी बिक जाता तो उसकी ग्रुप एडिटर बनने वालीं थीं देश की एक बड़ी पॉलटिकल जर्नलिस्ट, जो भारत के बहुत बड़े मीडिया घराने से जुड़ी हुई हैं। स्पाइसजेट के प्रमोटर अजय सिंह के एनडीटीवी खरीदने की खबर पिछले दिनों काफी प्रतिष्ठित मीडिया पब्लिकेंशन में छपी थी, लेकिन किसी वजह से वो डील नहीं हो पाई। 

अब सूत्रों से पता चला है कि अगर डील हो जाती तो देश की एक बड़ी ही नामचीन इंग्लिश मीडिया जर्नलिस्ट उसकी ग्रुप एडिटर होतीं। बताया जा रहा है कि इस बावत अजय सिंह से उनकी मुलाकात भी हो चुकी थी।

सूत्रों के मुताबिक ये लेडी जर्नलिस्ट पॉलटिकल फील्ड में काफी अच्छी पकड़ रखती हैं, एग्रेसिव तेवरों के लिए मशहूर अपने बॉस के लिए वो दायां हाथ थीं। मोदी सरकार के कुछ बड़े मंत्रियों से उनकी नजदीकी भी हैं। चूंकि बॉस तो पॉलटिकल लोगों से जुड़ें फंक्शंस में जाते नहीं थे, तो पॉलिटिकल सर्किल में इन्हीं का जलवा कायम था और इसी के चलते पॉलिटिकल स्टोरीज के लिए बॉस भी जरूरत से ज्यादा इन्हीं सीनियर लेडी जर्नलिस्ट पर ही निर्भर थे। लेकिन अचानक उसके बॉस ने इस्तीफा दिया और खुद का नया ग्रुप खड़ा कर लिया। पहले तो कयास लगाए गए कि ये मोहतरमा भी अपने बॉस के साथ ही चैनल छोड़ देंगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

सूत्र बताते हैं कि लेडी जर्नलिस्ट को उम्मीद थी कि बॉस के जाने के बाद नंबर टू पर होने के चलते उनको ही चैनल का बॉस बनाया जाएगा, लेकिन मामला तब उलट गया, जब चैनल मैनेजमेंट किसी और चैनल से टेस्टेड चर्चित चेहरा ले आए और उसे बॉस घोषित कर दिया। 

ऐसे में जब खबर आई कि एनडीटीवी को अजय सिंह खरीद सकते हैं, तो इन मोहतरमा को लगा कि जो सपना उनका उस वक्त टूट गया था, अब वो पूरा हो सकता है, तो बस फिर क्या, उन्होंने आनन-फानन मे की अजय सिंह से मुलाकात। एक-दो मुलाकातों के बाद इन्होंने अपने लिए ग्रुप एडिटर पोस्ट की मांग और चार शर्तें रखी गई हैं। पहली शर्त ये थी कि उन्हें दो करोड़ सालाना का पैकेज दिया जाए, दूसरी शर्त थी कि एक करोड़ रुपया उन्हें बतौर साइनिंग एमाउंट दिए जाए। तीसरी शर्त थी कि सेंट्रल दिल्ली में एक घर दिलवाया जाए और चौथी शर्त थी उन्हें एक लक्जीरियस कार दी जाए, ब्रैंड भी बताया गया जिसकी कीमत एक से डेढ़ करोड़ रुपए के बीच थी। हालांकि ये पता नहीं चल पाया कि ये एक करोड़ 6 महीने की सैलरी बतौर एडवांस थे या ज्वॉनिंग से पहले ऐसे ही देने थे, एक बड़ा ग्रुप छोड़ने की कीमत? सेंट्रल दिल्ली में घर के बारे में भी ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई कि उसकी कीमत, एरिया या टाइप (बंगला या फ्लैट) क्या मांगे गए थे।  

लेकिन सूत्र बताते हैं कि प्रणॉय रॉय ने कुछ जानकारियां इस डील में पहले अजय सिंह को नहीं बताई थीं, जो ऐन वक्त पर सामने आईं तो डील को स्थगित कर दिया गया। अब ये डील बाद में होगी या नहीं इसके बारे में भी जानकारी नहीं है। वजह कुछ भी हो लेकिन डील रुकने से इस बड़ी टीवी जर्नलिस्ट के अरमानों पर फिलहाल पानी जरूर फिर गया है...

 

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