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'जब पत्रकार देश टूटने की बात लिख रहे थे, तो क्या बोले राजेन्द्र माथुर'

Tuesday, 07 August, 2018

वरिष्ठ पत्रकार और आउटलुक हिंदी पत्रिका के प्रधान संपादक आलोक मेहता ने अपनी किताब ‘सपनों में बनता देश’ में राजेन्द्र माथुर के बारे में लिखा है - ‘1984-86 के दौरान गुप्तचर एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सवाल किया आखिर माथुर जी हैं क्या? लेखन से वे कभी कांग्रेसी लगते हैं, कभी हिन्दूवादी संघी, तो कभी समाजवादी? क्या है उनकी पृष्ठभूमि? उस जासूस की उलझन भरी बातों से मुझे खुशी हुई। मैंने कहा माथुर साहब हर विचारधार में डुबकी लगाकर ऊपर आ जाते हैं। उन्हें बहाकर ले जाने की ताकत किसी भी पार्टी या विचारधारा में नहीं है। वह कभी किसी एक के साथ नहीं जुड़े। वह सच्चे अर्थो में राष्ट्र भक्त हैं, उनके लिए भारत राष्ट्र ही सर्वोपरि है। राष्ट्र के लिए वे कितने भी बड़े बलिदान और त्याग के पक्षधर हैं।' यहां पढ़िए वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता द्वारा राजेन्द्र माथुर पर किताब में लिखी बातें:

(7 अगस्त राजेंद्र माथुरजी का जन्मदिन है, चुनिंदा लेखों के जरिए उनको हमारा नमन )

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