पाठशाला4मीडिया
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लेखक और संवाददाता में कई बुनियादी फर्क हैं। कोई कहानीकार सत्यकथाएं लिख सकता है, सत्य पर आधारित कथाएं लिख सकता है, जिनमें सत्य और कल्पना का रुचिकर संगम हो। अपनी कल्पनाशक्ति से पूरा का पूरा कथानक गढ़ सकने के लिए भी वह पूर्णत: स्वतंत्र होता है।
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शैली पुस्तिका ऐसे नियमों और प्रयोगों का एक संकलन है जिसमें उन शब्दों की चर्चा होती है जिनके एक से ज्यादा रूप प्रचलन में हों। जैसे हिंदी में अमरीका लिखा जाता है और अमेरिका भी। ऐसे रूपों की समस्या सिर्फ भाषा और वर्तनी में ही नहीं होती।
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पत्रकारिता में समाचार, रिपोर्ताज, फीचर आदि कई विधाएं हैं। हर व्यक्ति किसी न किसी विधा में स्पेशलिस्ट बन सकता है। कोई अच्छे समाचार लिख सकता है और कोई दूसरा बढिय़ा फीचर लिख सकता है। कुछ लोग हरफनमौला भी हो सकते हैं, होते ही हैं।
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पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों की भाषा पर अच्छी पकड़ होना एक अनिवार्य आवश्यकता है। भाषा पर पकड़ होने से भावों की अभिव्यक्ति सरलता से हो पाती है और भाषा में प्रवाह रहता है। शब्दों के सही चयन से भाषा की दुरूहता जाती रहती है और पाठक की रुचि बनी रहती है ।
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वरिष्ठ शिक्षाविद बी के कुठियाला ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय विश्वविद्यालय ऑफ जर्नलिज्म और कम्युनिकेशन भोपाल में वाइस चांसलर का कार्यभार संभाल लिया है। उनके पास मीडिया और शिक्षा के क्षेत्र का 39 वर्षों का अनुभव है।

