हिंदी मीडिया को अपनी ताकत का नशा हो गया
राम बहादुर राय, संपादक, प्रथम प्रवक्ता
- 04/09/2010
अनंत नाथ, डायरेक्टर, दिल्ली प्रेस
सर्वेक्षण की अनुसंधान प्रणाली में पिछली विषंगितयों और दोषों को दूर करने के लिए कुछ नहीं किया गया है। काफी लंबे समय से बोर्ड भर में प्रकाशकों के डेटा प्रक्रिया के संग्रह की विश्वसनीयता और प्रक्रिया के बारे में सवाल उठाया जा रहा है
- 26/08/2010मनजीत घोषाल, एमडी और सीईओ, मिड-डे इंफोमीडियामैं मीडिया में पिछले दस सालों से हूं और मैं ऐसे किसी व्यक्ति के संपर्क में नहीं आया जिसने आईआरएस फॉर्म भरा हो, मुझे कोई आश्चर्य नहीं होता है। मैं ऐसे व्यक्तियों को भी जानता हूं जो मीडिया इंडस्ट्री में 40 वर्षों से हैं और वे सभी किसी ऐसे व्यक्ति से नहीं मिले, जिन्होंने आईआरएस फॉर्म भरा हो
- 23/08/2010मृणाल पाण्डे, वरिष्ठ पत्रकारदेश की राष्ट्रपति, मुख्य चुनाव आयुक्त तथा मीडिया व राजनीति के पुरोधाओं की तरफ से मीडिया में बढ़ते छिछोरेपन, गहराते भ्रष्टाचार तथा मीडिया संस्थानों द्वारा पैसा लेकर खबरें छापने पर, इधर लगातार कई गंभीर टिप्पणियां जारी हुई हैं।
- 19/08/2010
जय प्रकाश चौकसे, वरिष्ठ फिल्म समीक्षक
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की आत्मा का तोता टीआरपी नामक पिंजरे में कैद है। टेलीविजन पर लोकप्रियता का आकलन करने वाली अंतरराष्ट्रीय ख्याति की कंपनी ने सांस्कृतिक विविधता वाले भारत में मात्र सात हजार घरों में उनके मीटर लगाए हैं और यह बताना कठिन है कि मीटर नौकर के कक्ष में लगा है या मालिक के टीवी में। कितने मीटर ग्रामीण क्षेत्र में हैं और कितने महानगरों में।
- 10/08/2010
सुनील जैन, सीनियर एसोसिएट एडिटर, बिजनेस स्टैंडर्ड
प्रेस परिषद कहती है कि उसके पास सीमित अधिकार हैं जो उसे कदाचार के दोषियों पर दंड आरोपित करने की अनुमति नहीं देते और टेलीविजन न्यूज के मामले में ये सीमित अधिकार भी लागू नहीं होते। लेकिन वह किसी का नाम लेकर उसे आसानी से शर्मसार कर सकती थी। इससे संकेत मिलता है कि पेड न्यूज के कारोबार में शामिल अखबार कितने ताकतवर हैं कि उन्होंने प्रेस परिषद को अपना नाम सामने आने देने से भी रोक दिया।


