कुलदीप कुमार को मिलेगा म्यूजिक फोरम का मीडिया एक्सीलेंस अवार्ड
- 17/05/2012
पीयूष पांडे, वरिष्ठ वेब पत्रकार
फिल्म अभिनेता आमिर खान ने अपने टेलीविजन कार्यक्रम ‘सत्यमेव जयते’ के प्रचार के लिए सोशल मीडिया के तमाम मंचों को भी रणनीतिक तरीके से चुना। नतीजा छह मई को कार्यक्रम की पहली कड़ी के प्रसारण के साथ ही दिख गया। माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर उस दिन शुरुआती चार घंटों तक हर दो सेकेंड में एक ट्वीट सत्यमेव जयते से संबंधित लिखा गया। स्टारकॉम मीडियावेस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक 9 मई तक सत्यमेव जयते के फेसबुक पेज को करीब 6.5 लाख लोगों ने पसंद किया और ट्विटर पर यह कार्यक्रम लगातार टॉप-5 विषयों यानी ट्रेंडिंग टॉपिक में रहा
- 14/05/2012
रवि शंकर, स्वतंत्र पत्रकार
हाल ही में विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष जस्टिस मार्कडेय काटजू ने मीडिया को फिर निशाने पर लेते हुए कहा कि वह अंधविश्वास और रूढि़वादिता को बढ़ावा देकर सामाजिक और आर्थिक मुद्दों से लोगों का ध्यान हटा रहा है। गौरतलब है कि जस्टिस काटजू ने मीडिया पर आरोप लगाया है कि मीडिया सनसनी फैलाने की कोशिश में तथ्यों को तोड़ – मरोड़ कर पेश करती है। ताकि मीडिया घराने दर्शकों की संख्या में इजाफे करने के साथ- साथ ज्यादा कमाई कर सकें
- 14/05/2012
संजय द्विवेदी, प्रोफेसर, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय
हिंदुस्तान में रहते हुए हम किसी भी इलाके में जाएं उर्दू हमारा साथ नहीं छोड़ती। वह हिंदी की ही तरह राष्ट्रभाषा है, जिसकी जमीन बहुत व्यापक और जड़ें बहुत गहरी हैं। पाकिस्तान के निर्माण ने उर्दू की इस रफ्तार को रोक दिया। उर्दू एक खास तबके की भाषा बनकर रह गयी। वह हिंदुस्तानी जबान से एक कौम की जबान बन गयी या बना दी गयी। ऐसे समय में उर्दू सहाफत (पत्रकारिता) पर बात करना सच में अतीत के उन सुनहरे पन्नों को टटोलने की कोशिश है, जब जंगे आजादी की लड़ाई में उर्दू अखबारों ने सबसे कड़े शब्दों में अंग्रेजी सत्ता का प्रतिकार किया था - 10/05/2012
अमित शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार
फेसबुक से बहुत-से लोग दुखी हैं। इसलिए कि इस बला ने उनके अपनों को वर्चुअल दुनिया में उलझा दिया है। वे 'फेस टू फेस' रिलेशन को भूल 'फेसबुक' में उलझ रहे हैं। खुद मैं भी इसका शिकार हूं। जरा ज्यादा देर फेसबुक पर ऑनलाइन हो जाऊं तो श्रीमतीजी जली हुई रोटियां परोसकर सांकेतिक विरोध जता देती हैं। खैर...
- 07/05/2012पंकज चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकारएक एपीसोड की एंकरिंग करने का मेहनताना तीन करोड़-- तिस पर तुर्रा कि समाज की चिंता। कुछ आंसू, कुछ भावनाएं, कुछ तथ्य और कुछ ‘‘मीडिया-हाईप’ - कुल मिला कर इसी का घालमेल है- सत्यमेव जयते।


