समाचार4मीडिया.कॉम की प्रासंगिकता
पीके खुराना
संपादक
समाचार4मीडिया.कॉम
‘मीडिया’ अब कई मायनों में बदल गया है। इंटरनेट और ब्लॉग के प्रादुर्भाव ने पत्रकारिता में बड़े परिवर्तन का द्वार खोला है। अभी कुछ वर्ष पूर्व तक ‘खबर’ वह होती थी जो अखबारों में छप जाए या रेडियो-टीवी पर प्रसारित हो जाए। पहले इंटरनेट न्यूज वेबसाइट्स और अब ब्लॉग की सुविधा के बाद तो एक क्रांति ही आ गयी है। न्यूज वेबसाइट्स ने छपाई, ढुलाई और कागज का खर्च बचाया तो ब्लॉग ने शेष खर्च भी समाप्त कर दिये। ब्लॉग पर तो समाचारों का प्रकाशन लगभग मुफ्त में संभव है।
ब्लॉग की क्रांति से एक और बड़ा बदलाव आया है। इंटरनेट के प्रादुर्भाव से पूर्व ‘पत्रकार’ वही था जो किसी अखबार, टीवी, समाचार चैनल अथवा आकाशवाणी (रेडियो) से जुड़ा हुआ था। किसी अखबार, रेडियो या टीवी न्यूज चैनल से जुड़े बिना कोई व्यक्ति ‘पत्रकार’नहीं कहला सकता था। न्यूज़ मीडिया केवल आकाशवाणी, टीवी और समाचारपत्र, इन तीन माध्यमों तक ही सीमित था, क्योंकि आपके पास समाचार हो, तो भी यदि वह प्रकाशित अथवा प्रसारित न हो पाए तो आप पत्रकार नहीं कहला सकते थे। परंतु ब्लॉग ने सभी अड़चनें समाप्त कर दी हैं। अब कोई भी व्यक्ति लगभग मुफ्त में अपना ब्लॉग बना सकता है, ब्लॉग में मनचाही सामग्री प्रकाशित कर सकता है और लोगों का ब्लॉग की जानकारी दे सकता है, अथवा सर्च इंजनों के माध्यम से लोग उस ब्लॉग की जानकारी पा सकते हैं। स्थिति यह है कि ब्लॉग यदि लोकप्रिय हो जाए तो पारंपरिक मीडिया के लोग ब्लॉग में दी गई सूचना को प्रकाशित-प्रसारित करते हैं। अब पारंपरिक मीडिया इंटरनेट के पीछे चलता है।
अमेरिका के लगभग हर पत्रकार का अपना ब्लॉग है। भारतवर्ष में भी अब प्रतिष्ठित अखबारों से जुड़े होने के बावजूद बहुत से पत्रकारों ने ब्लॉग को अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया है। यही नहीं, कई समाचारपत्रों ने भी अपने पत्रकारों के लिए ब्लॉग की व्यवस्था आरंभ की है जहां समाचारपत्रों में छपी खबरों के अलावा भी आपको बहुत कुछ और जानने को मिलता है। इंटरनेट पर अंग्रेजी ही नहीं, हिंदी में भी हर तरह की उपयोगी और जानकारीपूर्ण सामग्री प्रचुरता से उपलब्ध है। पत्रकारिता से जुड़े पुराने लोग जो इंटरनेट की महत्ता से वाकिफ नहीं हैं अथवा कुछ ऐसे मीडिया घराने जो अभी ब्लॉग के बारे में नहीं जानते, आने वाले कुछ ही सालों में, या शायद उससे भी पूर्व, इंटरनेट और ब्लॉग की ताकत के आगे नतमस्तक होने को विवश होंगे।
मीडिया घरानों के नज़रिये में कुछ और बदलाव भी आये हैं। कुछ वर्ष पूर्व तक अखबारों में खबर का मतलब राजनीति की खबर हुआ करता था। प्रधानमंत्री ने क्या कहा, संसद में क्या हुआ, कौन सा कानून बना, आदि ही समाचारों के विषय थे। उसके अलावा कुछ सामाजिक सरोकार की खबरें होती थीं। समय बदला और अखबारों ने खेल को ज्यादा महत्व देना शुरू कर दिया। आज क्रिकेट के सीज़न में अखबारों के पेज के पेज क्रिकेट का जश्न मनाते हैं। इसी तरह से बहुत से अखबारों ने अब बिजनेस और कॉरपोरेट खबरों को प्रमुखता से छापना शुरू कर दिया है। फिर भी देखा गया है कि जो पत्रकार बिजनेस बीट पर नहीं है, वे इन खबरों का महत्व बहुत कम करके आंकते हैं। वे भूल जाते हैं कि आर्थिक गतिविधियां हमारे जीवन का स्तर ऊंचा उठा सकती है। इससे भी बढ़कर वे यह भूल जाते हैं कि पूंजी के अभाव में खुद उनके समाचारपत्र बंद भी हो सकते हैं। यदि हम भारतवर्ष को एक विकसित देश के रूप में देखना चाहते हैं तो हमें समझना होगा कि मीडिया घरानों से जुड़े हम पत्रकारों को गरीबी से ही नहीं, गरीबी की मानसिकता से भी लड़ना होगा।
हमारा देश अभी मंदी की मार से पूरी तरह उबरा नहीं है। मीडिया घरानों के समक्ष बहुत सी आर्थिक चुनौतियां हैं। उन चुनौतियों का सामना करते हुए भी पत्रकारिता के आदर्शों और स्तर को कैसे बनाये रखा जाए, समाचार4मीडिया.कॉम इस दिशा में कई रचनात्मक पहलकदमियां करेगा, जो शीघ्र ही आपके सामने होंगी। हमारा प्रयत्न यह है कि समाचार4मीडिया.कॉम, मीडिया, जनसंपर्क, विज्ञापन और मार्केटिंग क्षेत्र की सूचना, दशा-दिशा, चिंतन और विमर्श से संबंधित एक जीवंत पोर्टल बने। समाचारपत्र, टीवी, रेडियो, समाचार पोर्टल, ब्लॉग, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों, प्रेस क्लबों की गतिविधियों आदि की खबरों सहित जनसंचार के साधनों, यानी मीडिया पर विशेष फोकस के साथ यह विज्ञापन, जनसंपर्क और मार्केटिंग क्षेत्र के समाचार, विश्लेषण और रूझानों की जानकारी का विश्वसनीय मंच बनेगा। हमारा प्रयास है कि समाचार4मीडिया ऐसा मंच हो जो मीडिया, विज्ञापन और मार्केटिंग जगत की परिपक्व और रचनात्मक जानकारियां, रुझान और उपयोगी विश्लेषण उपलब्ध करवाये।
मीडिया, विज्ञापन, विक्रय, ईवेंट मैनेजमेंट आदि क्षेत्र में हजारों लोग कार्यरत हैं और रोज इन क्षेत्रों में नये लोग बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। कार्यरत पत्रकारों और पेशेवरों के लिए रिफ्रेशर कोर्स अनिवार्य आवश्यकता हैं। इन क्षेत्रों से संबंधित कार्यशालाओं, सेमिनारों, गोष्ठियों, प्रशिक्षण और रोजगारों के अवसरों की जानकारी देना भी हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है।
समाचार4मीडिया.कॉम, एक्सचेंज4मीडिया समूह का एक उपक्रम है जिसकी विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा के उदाहरण दिये जाते हैं। समाचार4मीडिया.कॉम की पूरी टीम इन्हीं आदर्शों से प्रेरित है और हम जी-जान से हर संभव प्रयास करेंगे कि अपने पाठकों को सबसे पहले खबर दें पर समाचारों की सत्यता, समग्रता और निष्पक्षता के मामले में कोई समझौता न करें।
मैं अपने ब्लॉग http://www.myindiadotcom.blogspot.com पर भी आपसे रूबरू हूं।
- 06/03/2010
जॉन ग्रे की प्रसिद्ध पुस्तक मेन आर फ्राम मार्स, वीमेन आर फ्राम वीनस में शायद पहली बार पुरुषों और महिलाओं के व्यवहार और दृष्टिकोण तथा तनाव के समय उनकी प्रतिक्रियाओं के अंतर के बारे में विस्तार से चर्चा की गई थी।
- 27/02/2010
होली फिर आई है और होली के नाम से ही हमारी कल्पना में रंगों की बहार छाने लगती है। होलिका दहन, मिठाई, भाभियों, सालियों, देवरों आदि से ठिठोली, दोस्तों के संग मस्ती, रूठे हुए मित्रों से मिल बैठकर गिले-शिकवे दूर करने का मौका .... और अबीर, गुलाल तथा रंगों की बहार।
- 20/02/2010
15 फरवरी, 2010 का दिन मेरे लिए शायद सिर्फ इसलिए विशेष रहता कि एक्सचेंज4मीडिया समूह की मीडिया, एडवरटाइजिंग, जनसंपर्क, विज्ञापन और मार्केटिंग की खबरें देने वाली हिंदी भाषा की नई वेबसाइट समाचार4मीडिया.कॉम का लांच हुआ।


टिप्पणी
Great! I am really impressed.
Great! I am really impressed. I think blogs, kindle and e newspapers are the need of this instant age. Eventually traditional newspapers and magazines would be phased out to protect environment and save trees that are being ruthlessly cut for the newsprint(paper). The newspapers and magazines may not be available for door to door circulation particularly those in English few years from hence. Perhaps these would be available with the corporate houses, offices and libraries.Time has come for journalists to learn nuances of new media and become tech savy before they become unwanted and unwelcome in their respective oranisations. The moral is update your skills and be a student every day, every hour, every minute and every moment.-Charanjit Ahuja, Journalist, Chandigarh