भीड़ भरे बाजार में सफल होना बड़ी बात है

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लगभग साढ़े 12 साल के बाद, सीमा मोहपात्रा ने 14 नवंबर, 2011 को ‘बीबीसी वर्ल्डवाइड’ से इस्तीफा दे दिया। वे‘बीबीसी वर्ल्डवाइड’ के एड सेल्स एवं ‘बीबीसीएडवरटाइजिंग’ में रीजनल डायरेक्टर साउथ एशिया के पद पर कार्यरत थीं। उनके अचानक इस्तीफे से कई लोगों को आश्चर्य हुआ है। मोहपात्रा ‘बीबीसी वर्ल्ड न्यूज़’, ‘बीबीसीएंटरटेनमेंट’, ‘बीबीसी.कॉम’, मोबाइल एवं लोनलीप्लैनेट के राजस्व के लिए जिम्मेदार थीं। वे 1999 में ‘बीबीसी’ से जुड़ी हुई थीं और कंपनी को एक चैनल से बढ़ाकर मल्टी चैनल, मल्टी प्लेटफॉर्म में बदलने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मोहपात्रा ने एक्सचेंज4मीडिया समूह से ‘बीबीसी वर्ल्डवाइड’में बिताए अपने पलों के बारे में विस्तार से बात की।

आप बीबीसी वर्ल्डवाइड में 12 साल से अधिक समय तक रहीं। अपने आगे की योजनाओं के बारे में बतायें?
भविष्य को लेकर काफी उत्साहित हूं और मैंने अपनी जिंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यहां बिताए हैं, सो जाते समय थोड़ी उदास हूं। लेकिन मुझे इस बात की खुशी है कि मैं ‘बीबीसी’ को एक ऐसे मुकाम पर छोड़ रही ,हूं जब वह भारत में काफी मजबूत स्थिति में है। मुझे इस बात का गर्व है कि मैंने संस्थान के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की, मैंने सेल्स के लिए बेहतरीन टीम की स्थापना और उसका नेतृत्व किया। और मैं ऐसे समय में ‘बीबीसी’ को छोड़ रही हूं जब ‘बीबीसी’ का राजस्व और बिजनेस साल दर साल बढ़ रहा है, मैं एक महत्वपूर्ण विरासत ‘बीबीसी’ के अपने सहयोगियों को सौंप रही हूं। इतने बड़े शक्तिशाली मीडिया ब्रांड के साथ काम करना और विश्व में इसके बिजनेस में बढ़ोतरी करना अपने आप में एक चुनौती से कम नहीं है। मैंने खुद को चुनौती के रुप में लिया और मार्केट में ‘बीबीसी’ के सभी प्रोडक्ट की सफलता के लिए दिन-रात काम किया। मैं अपने सहयोगियों के हाथों में एक ऐसी विरासत छोड़े जा रही हूं जो आगे भी विकास के पथ पर लगातार अग्रसर रहेगा।

1999 से बीबीसी के साथ बिताए अब तक के कुछ यादगार लम्हें?
कई सारे पल हैं लेकिन अगर टॉप फाइव की बात करुं तो‘बीबीसी वर्ल्ड न्यूज़’ की भारत में एकीकरण से शुरुआत होती है। हम ऐसा करने वाले पहले थे जिन्हें इस क्षेत्र में एक अवसर दिखा और हमने एक सफल अंतरराष्ट्रीय राजस्व मार्केट का निर्माण किया। हम लोग भारत सहित वैश्वविक स्तर पर डिजिटल बिजनेस की स्थापना में सक्षम हुए। इसके साथ ही हमने भारत में, सफलतापूर्वक ‘बीबीसीएंटरटेनमेंट’ चैनल को री-लॉन्च किया और अंतत: हम वास्तविक में एक मल्टी प्लेटफॉर्म और मल्टी चैनल एडवरटाइजिंग सेल्स संगठन की स्थापना में सक्षम हुए। साढ़े 12 सालों तक विश्व के इस शक्तिशाली मीडिया संगठन‘बीबीसी वर्ल्डवाइड’ का हिस्सा बनकर मैं काफी उत्साहित हूं। मुझे नए चैनल की लॉन्चिंग और भारत में डिजिटल बिजनेस को शुरू करने का अवसर मिला और इस दौरान में बेहतरीन मीडिया प्रोफेशनलों के साथ मुझे काम करने का मौका मिला।

‘बीबीसी ने वैश्विक स्तर पर और भारत में भी कुछ कठिन समय देखे हैं। ऐसे में आप अपनी टीम को किस तरह से टॉप पर टिके रहने के लिए किस तरह से प्रेरित करती थीं
भारत और वैश्विक स्तर पर मार्केट काफी गतिशील है। ऐसे में प्रभावशाली रणनीति और उसे लागू करने की प्रतिबद्धता से अच्छे नतीजे निकलते हैं। हालांकि, लीडर्स के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि वे अपनी टीम को प्रेरित करता रहे और उसका मनोबल उंचा बनाए रखे। मेरी टीम में टॉप पर बने रहने के लिए प्रतिबद्धता, कुशलता और अभिनव प्रयोग करने की अद्भुत क्षमता थी। जैसा कि आपको मालूम होगा कि ‘बीबीसी’ ने हाल के दिनों में भारत में काफी निवेश किया है। इसके तहत, ‘बीबीसी’ का ‘इंडिया संस्करण’ को ऑनलाइन करना, ‘बीबीसी वर्ल्ड न्यूज़’ पर ‘इंडिया डायरेक्ट’नाम से भारत के लिए विशेष रुप से कार्यक्रमों की एक श्रृंखला का निर्माण और ‘बीबीसी एंटरटेनमेंट’ पर नए कंटेंट शामिल है।

जब आप बीबीसी छोड़ रही हैं, तो कंपनी कौन से ऐसी क्वालिटी आप गिनाएंगी जिनके चलते आपको इस पर गर्व होता है?
कंपनी अपने सभी कार्यक्रमों के निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष तौर पर जोर देती है जैसै पत्रकारिता, प्रोग्रामिंग, अपने उपभोक्ताओं तक पहुंचना, दर्शकों/पाठकों सहित विज्ञापनदाताओं का विशेष ध्यान रखती है। ‘बीबीसी’गुणवत्ता का विशेष ख्याल रखती है और ट्रस्ट और संगठन की एकाग्रता के साथ कोई समझौता नहीं करती है। बदलते मीडिया परिदृश्य में भी ‘बीबीसी’ का संपादकीय नैतिकता काफी मजबूत है और वो इस पर टिकी हुई है। मैं खुद प्रोफेशनली और व्यक्तिगत तौर पर इस तरह के मूल्यों के साथ बढ़ी हूं।

आपने भारत में बीबीसी डिजिटल और चैनल्स दोनों सेवाओं को हैंडल किया है। सबसे अधिक किस सेवा ने आपको रोमांचित किया?
दोनों भारत में विकास के अलग-अलग स्तर पर मौजूद है और दोनों की अलग-अलग चुनौतियां है। अभी भी टेलीविजन का विकास हो रहा है और डिजिटल हर उस जगह पर है जहां कुछ नया विकास हो रहा है। ‘बीबीसी’ सभी माध्यमों यथा ऑनलाइन, मोबाइल, एंड्रॉयड, आईपैड पर मौजूद है और सभी को एकीकृत सेवा के तहत लाना अपने आप में रोमांचक और सराहनीय कार्य है। आप कह सकते हैं कि एक चैनल को लॉन्च करना बेहद रोमांचक क्षण है और फिर काफी भीड़ भरे बाजार में उसका सफल होना बड़ी बात है।

इस मोड़ पर हम आपसे क्या उम्मीद करें? क्या आप उद्यमी बनना चाहेंगी या मीडिया इंडस्ट्री में पूर्व की तरह कार्य करना चाहेंगी? या नई इंडस्ट्री के साथ कुछ नए प्रयोग करना चाहेंगी?
सबसे पहले मैं कुछ आराम करना चाहूंगी और फिर खुले दिमाग से आगे के बारे में सोचूंगी। आगे मीडिया और मीडिया के बाहर भी कई अवसर मौजूद हैं और इसके अलावा, सामाजिक उद्यमिता के स्तर पर भी कई सारे अवसर हैं। सबसे पहली प्राथमिकता परिवार के साथ कुछ पल बिताने की है।

इस वर्ष भारतीय मीडिया इंडस्ट्री को कुछ बहुत ही उच्च प्रोफाइल लोगों ने अलविदा कहा है। आपकी नजरों में हमारे इंडस्ट्री के लिए इसके क्या मायने हैं?
यह काफी रोमांचक समय है और लोगों ने उन मीडिया कंपनियों की सफलता में काफी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह बड़ी बात है कि इतने सारे लोग एक साथ नए अवसरों की तलाश में निकले हैं और वे अपने प्रयासों में निरंतर लगे हुए हैं, जो उनमें एक नई सोच और उर्जा का संचार पैदा करेगी
 
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  • 14/05/2012

    राणा यशवंत, ग्रुप एडिटर, महुआ न्यूज

    जो दर्शक न्यूज़ चैनल देखता है, वही एंटरटेनमेंट भी देखता है। आपको बस दर्शक के दिमाग का ब्लूप्रिंट समझना है। न्यूज़ और एंटरटेनमेंट में ज्यादा फर्क नहीं है। दोंनों में दर्शकों के माइंडसेट को पढ़ने की जरूरत होती है

     

  • 29/04/2012

    उर्मिलेश, एग्जीक्यूटिव एडिटर, राज्यसभा टीवी

    एक पार्लियामेंट्री चैनल के लिहाज से जितना कंटेंट हो सकता है, हम रख रहे हैं। हमारा कॉन्सेप्ट पूरी तरह से क्लीयर है। हम बाकी चैनलों की तरह सनसनी फैलाकर अपने आपको स्थापित करने में विश्वास नहीं रखते

  • 16/04/2012

    प्रसून जोशी, एक्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ, मॅक्कन वर्ल्ड ग्रुप इंडिया प्रेसिडेंट, साउथ एशिया
    कवि, साहित्य और संगीत के क्षेत्र का व्यक्ति होने के नाते मुझे इस भूमिका में काफी मदद मिलती है। मुझे इस बात का डर नहीं कि मैं कई संस्कृतियों को डील कर रहा हूं, बल्कि मैं सहज हूं।
     
     

  • 18/03/2012
    नीलाभ मिश्रा, संपादक, आउटलुक हिन्दी
    हां, यह सही है कि समाचार, मैगजीन की सर्कुलेशनल और रीडरशिप कम हो रही है। इसका मुख्य कारण ‘सातों दिन 24 घंटे’ चलने वाले टेलीविजन और दैनिक अखबार हैं। जब पाठक न्यूज देख भी रहा है और पढ़ भी रहा है तो वो मैगजीन क्यों खरीदेगा? समाचार मैगजीन में उन्हीं मैगजीनों को सफलता मिल सकती है जो टेलीविजन और अखबार से हटकर एक्सक्लूसिव खबरें दे।

     

  • 01/03/2012
    रितु धवन, सीईओ और एमडी, इंडिया टीवी
    मीडिया उन सभी के लिए है जो कड़ी मेहनत करना चाहते हैं और अपने काम के प्रति समर्पित हैं। फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष। अगर कोई पुरुष है और इन पैमानों पर खरा नहीं उतरता तो वह कभी सफल नहीं हो पाएगा और बिल्कुल वैसा ही महिला के साथ भी है। मीडिया में होने की जो सबसे बड़ी योग्यता है वह है कड़ी मेहनत