ब्लॉग के माध्यम का दुरुपयोग दुर्भाग्यपूर्ण

ब्लॉग अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है। जिसने हम सब को दुनिया के सामने अपनी बात रखने की स्वतंत्रता प्रदान की। यह एक किफायती और आसान माध्यम है। यहीं कारण है कि युवा पीढ़ी ने इसे तेजी से अपनाया है। दुर्भाग्यवश कुछ ब्लॉगर, यहां तक कि कुछ अनुभवी पत्रकार भी इसे अपनी नफरत दिखाने का जरिया बनाकर ब्लॉग के माध्यम का दुरुपयोग कर रहे हैं।

यूसुफ किरमानी एक अनुभवी पत्रकार और समर्पित ब्लॉगर हैं। वे पिछले लगभग दो दशकों से पत्रकारिता से जुड़े हैं। फिलहाल वे नवभारत टाइम्स में चीफ कॉपी एडिटर हैं। इससे पूर्व वे राष्ट्रीय सहारा, दैनिक जागरण और अमर उजाला में भी विभिन्न जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं। किरमानी के लेख अनेकों अखबारों मे छपते रहे हैं।पेश हैं समाचार4मीडिया.कॉम की संवाददाता सुप्रिया मिश्रा से हुई बातचीत के मुख्य अंश....
 
ब्लॉग का क्या महत्व है ?
हांलाकि यह एक बचकाना सवाल है, लेकिन इसका जबाव देना जरुरी है। आज जितने भी बड़े अखबार हैं वे सब अपनी आनलाइन साइट पर ब्लॉग को जगह दे रहे हैं।  नवभारत टाइम्स ऑनलाइन साइट पर कुछ महीने पहले तक कोई ब्लॉग नहीं हुआ करता था। अभी कुछ महीने पहले ही उसने ब्लॉग का कॉलम बनाया है। ब्लॉग पर सिर्फ उनका स्टाफ ही लिखता है। बाहर का कोई भी व्यक्ति वहां कुछ लिख नहीं सकता है, लेकिन पढ़ जरुर सकता है। ब्लॉग की सामग्री खबरों से बिल्कुल इतर होती है। अब आप खुद ही ब्लॉगों की उपयोगिता समझ सकती हैं।
 
ब्लॉग को आप संचार का कैसा माध्यम मानते हैं ?क्या इससे आधुनिक पत्रकारिता की दशा-दिशा में कोई फर्क आया है ?
ब्लॉग संचार का बहुत अच्छा और सकारात्मक माध्यम है, लेकिन अब जिस तरह से हिन्दी ब्लॉग की संख्या बढ रही है। उसको देखते हुए नये तरह का खतरा भी देखा जा सकता है। जैसे कोई व्यक्ति भारत या सिस्टम के खिलाफ लिखना शुरू कर दे तो इस तरह के खतरों से निपटने के लिए कोई चेक प्वाइंट जरूर होना चाहिए। जिससे उसे रोका जा सके। गूगल इस समय सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली साइट है और वह दावे भी बहुत करती है कि अगर कोई नकारात्मक टिप्पणी या आलोचना करता है तो वे उसे मिटा देते हैं। लेकिन गूगल एक अन्तरराष्ट्रीय कंपनी है जिसका हित अमेरिका में है और कई बार ऐसा हुआ है जब उसने भारत का हित नहीं देखा है। इसके अलावा समाज में कुछ मानसिक अस्थिरता वाले लोगों ने ब्लाग पर पोर्नोग्राफी शुरू कर दी है जो बहुत ही गलत है। समाज को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए कि किसी भी तकनीक या व्यवस्था का कोई दुरुपयोग न कर सके। अगर हम ब्लॉगिंग का सही उपयोग करें तो यह दुनिया, समाज और लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का बहुत अच्छा माध्यम है।
 
आप लम्बे समय से पत्रकारिता में हैं। इस क्षेत्र में क्या बदलाव आये हैं ?
इस क्षेत्र में जो सबसे बड़ा बदलाव आया है वह यह है कि जितने भी अखबार प्रकाशित हो रहे हैं वे सभी आधुनिकीकरण से प्रेरित हैं और वे अपने समाचार पत्र का भी आधुनिकीकरण कर रहे हैं। प्रिंट मीडिया का यह मानना है कि आगे चलकर लोग ई-पेपर पढ़ना पसंद करेंगे। अब पाठक को अखबार और खबरें, ऑनलाइन ही चाहिएं। पाठकों की इस बात को प्रिटं मीडिया ने बहुत गंभीरता से लिया। पहले किसी वेबसाइट पर 3-4 लोग काम किया करते थे लेकिन लगभग सभी ऑनलाइन मीडिया ने पाठको की मांग को देखते हुए अपना स्टॉफ बढ़ा दिया है। वैसे भी आज प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ गयी है और कोई भी इसमें पीछे नहीं रहना चाहता है। वेबसाइट की सीधी टक्कर इस समय इलेक्ट्रानिक मीडिया से है। ऑनलाइन मीडिया का दावा है कि हम ब्रेकिगं न्यूज टीवी से भी जल्दी देंगे।
 
आपको ब्लॉगिंग की आवश्यकता क्यों पड़ी?
मेरा यह मानना है कि अखबार में हमें निश्चित रणनीति के तहत काम करना पड़ता है जो पहले से ही प्रबंधक तंत्र द्वारा निर्धारित होती है। ब्लॉग मेरे लिए एक डायरी का काम करता है जहां मैं अपनी जिन्दगी के निजी पहलुओं को भी लिख सकता हूं और अपने लेख भी प्रसारित कर सकता हूं। इसके साथ ही ब्लॉग अपने विचारों को अभिव्यक्त करने का एक सस्ता और अच्छा साधन है। जिसके माध्यम से हम अपनी बात अलग तरीके और अलग ढंग से लोगों के बीच पहुंचा सकते हैं।
 
क्या ब्लॉग का वर्तमान स्वरूप, दशा-दिशा सही है या आप इसमें कोई बदलाव चाहते हैं ?
ब्लॉग की दशा-दिशा तो सही है लेकिन कुछ संकीर्ण मानसिकता वाले लोग ब्लॉग का गलत इस्तेमाल कर इसका दुरुपयोग कर रहे हैं जो बहुत गलत बात है। मै ब्लॉग में कोई बदलाव नहीं चाहता हूं, लेकिन ब्लॉग का इस्तेमाल करने वालों से जरूर कहूंगा कि वे ब्लॉग पर नकारात्मक भाषा का इस्तेमाल न करें।
 
ब्लॉग ने सिटिजन जर्नलिज्म को बढ़ावा दिया है लेकिन क्या इनकी भाषा और प्रस्तुति स्वस्थ -संतुलित है ? या इन पर किसी नियन्त्रण की आवश्यकता है ?
ब्लॉग की भाषा और प्रस्तुति पर नियत्रंण की बहुत आवश्यकता है। ब्लॉग पर एक आठवीं पास अपरिपक्व किशोर भी लिखता है और पीएचडी कर चुका व्यक्ति भी, इसलिए सेल्फ रेगुलेशन तो संभव नहीं है। दूसरी यह कि ब्लॉग पर लिखने वाला हर व्यक्ति पत्रकार नहीं होता है, जो हर खबर या बात को सलीके से लिखे। दुर्भाग्य तो यह है कि बहुत से पत्रकार भी ब्लॉग में असंयत और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। इंसान का जो तरीका होता है वह उसी के अनुरूप लिखता है।
 
पत्रकारिता को लेकर आज के पत्रकार और पुराने पत्रकारों के दृष्टिकोण में क्या अंतर है ?
आज के पत्रकारों और पुराने पत्रकारों के दृष्टिकोण में बहुत बड़ा अंतर है। आज का पत्रकार बहुत तेजी से आत्मसात करता है लेकिन पुराने पत्रकारों के पास अनुभव का खजाना है और एक्सपीरियंस का कोई मैच नही होता है। मेरा तो यह मानना है कि आज जो युवा पाठक बढ़ा है उसका मुख्य कारण नये पत्रकारों की पत्रकारिता ही है। नये पत्रकार वही लिखते हैं जो समाज में घटित हो रहा है और लोग उसे पढ़ना भी पसंद करते है। हेल्थ, फैशन, और खासकर लाइफ स्टाइल पत्रकारिता को जो बढ़ावा मिला वह इन नये पत्रकारों की ही देन है। जिसे आज के समाज में लोग खूब पसंद करते हैं।
 
बहुत से लोग ब्लॉग को मीडिया का गटर या कुंठाओं का उगलदान कहते हैं। आपकी इस पर क्या प्रतिक्रिया है ?
ऐसा लोग इसलिए कहते हैं क्योंकि आज बहुत से ब्लॉगरों ने इसे अपनी नफरत दिखाने का एक जरिया बना दिया है। जैसे मैं किसी से नफरत करता हूं तो ब्लॉग पर उसके खिलाफ लिखना या उसके खिलाफ भद्दी भाषा का उपयोग करना शुरु कर दूँ। अगर ऐसा होता रहा तो ब्लॉग का महत्व घट जायेगा।
 
आरोप है कि पत्रकारिता अब गंभीर होने के बजाय चटकीली हो गई है। आपकी क्या राय है ?
पत्रकारिता वक्त का दस्तावेज होती है। आज जो समाज में घटित हो रहा है या पाठक जो पढ़ना पसंद करता है, पत्रकार वही लिखता है, और अखबार वही छापता है। मैं आपको एक उदाहरण देता हूं, तत्रं-मंत्र या इसी तरह के कार्यक्रम दिखाने वाले चैनलों के प्रति लोग रोष तो व्यक्त करते हैं, लेकिन उतनी ही ललक से देखते भी हैं जिससे उन चैनलों की टीआरपी बढ़ती जाती है।
 
विज्ञापन की तरह-से पैसे लेकर खबरें छापना कितना उचित है। इस पर आपकी क्या प्रतिक्रियाहैं?
ये बहुत ही घटिया, घिनौना और निन्दनीय कार्य है। जो अखबार और न्यूज चैनल ऐसा कर रहे है वे भी घटिया हैं। किसी एक का नाम लेना उचित नही हैं।
 
खबरों की विश्वसनीयता बरकरार रखने के लिए क्या कदम उठाने की आवश्यकता है ?
खबरों पर आज भी लोगों का बहुत भरोसा है। हालांकि की लोग न्यूज चैनल पर न्यूज देख लेते हैं फिर भी सुबह उसी खबर को पढ़ने के लिए न्यूज पेपर का इंतजार करते हैं। इस लिए मीडिया को खबर में विश्वसनीयता बनाये रखने के लिए ब्लाग, निष्पक्ष और निर्भीक होकर लिखने और लिखने देने का हर संभव प्रयास करना चाहिए।
 
पत्रकारिता और राजनीति के घालमेल के बारे में आप क्या कहेंगे ?
वह भी घटिया बात है अगर कोई पत्रकार है तो उसे राजनीति में न जाना चाहिए। हाँ, उनका राजनीतिक मत हो सकता है लेकिन उसके आधार पर वे अखबार, चैनल या ब्लॉग पर उसका प्रचार करना बिल्कुल अनुचित है।
 
पत्रकारिता को आप कैसे परिभाषित करेंगे ? यह व्यवसाय है, पेशा है या मिशन !
मैं पत्रकारिता को पेशे के रूप में परिभाषित करूंगा ।
 
यदि आप किसी समाचार पत्र के संपादक होते तो आप उसमें क्या बदलाव करते ?
‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ मेरा आइडियल समाचार पत्र है अगर मैं किसी समाचार पत्र का संपादक होता तो उस समाचार पत्र की रूप रेखा ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की तरह ही होती।
 
पत्रकारिता के क्षेत्र में आने वाले युवाओं के लिए आपका संदेश ?
अगर युवाओं का दृष्टिकोण, चाह और मार्ग यही रहा तो पत्रकारिता ऐसे ही फलती-फूलती रहेगी। जो पत्रकारिता इस समय चल रही है अगर वे उसे अपनायेंगे तो बहुत दिनों तक इस क्षेत्र में टिके रहेंगे।
 
समाचार4मीडिया के लिए आपका संदेश ?
चूंकि इंटरनेट के क्षेत्र में हिन्दी की सहभागिता बहुत कम है तो हिन्दी में जितना भी आये कम ही है। मुझे खुशी है कि समाचार4मीडिया पोर्टल मीडिया की खबरों के साथ हिंदी में आ रहा है। मैं तहे दिल से यही दुआ करूंगा कि ईश्वर इसे कामयाब करे।

 

टिप्पणी

re

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