पीपली के बहाने....

वर्तिका नंदा

डॉ वर्तिका नन्दा,वरिष्ठ पत्रकार

पीपली लाइव देखने जाना ही था। वजह फिल्म की चर्चा से कहीं ज्यादा यह थी कि महमूद और अनुषा के साथ मुझे एक लंबे समय तक एनडीटीवी में काम करने का अवसर मिला था। महमूद ने उन दिनों एक स्टोरी में पीटूसी करते हुए शेक्सपीयर के एक बहुत लंबे पद्य को जब मुंहजबानी बोल डाला था, तब मुझमें यह उत्कंठा जाग उठी थी कि यह अलग-सा शख्स है कौन। बाद में पता चला कि आक्सफोर्ड और कैंब्रिज में पढ़े महमूद के पास इतिहास की जानकारी का जैसे खजाना ही है और वह दास्तानगोई में माहिर है। उर्दू, अंग्रेजी और हिंदी – तीनों भाषाओं में समान अधिकार वाला महमूद हमेशा हैरत में ही डालता था।
 
अनुषा की पहचान एक खुली सोच की थी। वह प्रोडक्शन में माहिर थी और हमेशा मुस्कुराती हुई मिलती थी। एनडीटीवी की कॉफी मशीन के पास जब वो दिखती, तब उसकी मुस्कुराह़ में सोच घुली हुई दिखती।
  
खैर, तो इस हफ्ते पीपली लाइव देखी। स्क्रीन में जो दिख रहा था, उससे ज्यादा मजेदार पीछे की सीटों पर घट रहा था। इलेक्ट्रानिक मीडिया का मजाक उड़ाते हर अंश पर पीछे की सीटों पर बैठे युवा खूब खुश होकर मजा लेते, चिल्लाते, हंसते, तालियां बजा कर देखते। उनकी प्रतिक्रिया से बहुत साफ था कि हो न हो, ये लोग मीडिया के ही हैं। खैर पीछे मुड़ कर देखा तो कई पहचाने चेहरे देखे। उनमें से कुछ युवा प्रोडक्शन वाले भी थे लेकिन मजे की बात यह कि वे सब स्क्रीन पर उभरते तमाशाई सच को देखकर भरपूर खुश थे।
 
फिल्म को देखते हुए, बकरी उठाए नत्था और उसके भाई बुधिया के चेहरे पर बेचारगी का जो भाव उभरता है, वह मीडिया के उस चेहरे को छील कर सामने लाता है जो आत्म केंद्रित, आत्म मुग्धा, आत्म प्रशंसक है। उसके कैमरे का लैंस अपने स्वार्थ से परे कुछ नहीं देखता। नत्था की पत्नी का एक आम भारतीय पत्नी की तरह गरियाना, नत्था का यह कहना कि भाई तुम ही कर लो आत्महत्या और बड़े भाई का छटपटाना कि जाने नत्था कब देगा अपनी जान – फिल्म को असल जिंदगी से जोड़ता है। यह छोटा-सा कुनबा समाज के उस हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है जो जीता घिसट-घसट कर है और जिसके लिए मरना भी आसान नहीं।
 
लेकिन इस फिल्म का सबसे दमदार कैरेक्टर राकेश नामक पत्रकार इनमें कुछ अलग है। उसकी खबर की समझ दिल्ली वालों से ज्यादा है, उसकी छठी इंद्री ज्यादा विकसित है और वो तत्पर है लेकिन आखिर तक चाहने पर भी उसे बड़े चैनल में नौकरी तो नसीब नहीं होती, गुमनाम मौत जरूर मिल जाती है।  
 
फिल्म कहती चलती है लेकिन साथ ही साथ सवालों के काफिले भी छोड़ती जाती है। पहली ही फिल्म से महमूद और अनुषा का चर्चा में आना काबिलेतारीफ है लेकिन साथ ही यह बात बड़ी गुदगुदाती है कि जो मीडिया कभी अपनी सहनशक्ति खोने लगा था, वो अब बड़े परदे पर अपना बाजा बजता देख कर भी खुश हो रहा है।
 
असल में यह एक बहुत बड़े बदलाव का सुखद संकेत है। बहुत दिनों के बाद पीपली लाइव के बहाने ही सही, मीडिया का सामने एक बड़ा आईना रखने की हिम्मत की गई है।
 
लेकिन यह सफर यहां थमना नहीं चाहिए.....
 
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  • 30/01/2012

    आनंद प्रधान, एसोसिएट प्रोफेसर, आईआईएमसी

    भारतीय मीडिया और खासकर टी.वी उद्योग में इन दिनों खासी हलचल है। वर्ष २०१२ की शुरुआत बहुत धमाकेदार रही। देश में शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों में बाजार पूंजीकरण के लिहाज से सबसे बड़ी कंपनी, मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने टी.वी-18/नेटवर्क-18 (मनोरंजन चैनल कलर्स और न्यूज चैनल सी.एन.एन-आई.बी.एन, सी.एन.बी.सी आदि) में कोई 17 अरब रूपये के निवेश का एलान करके सबको चौंका दिया।

     

  • 17/01/2012

    प्रमोद जोशी, वरिष्ठ पत्रकार

    इस बार पेड न्यूज़ पर भी आयोग की नज़र है। पर आयोग इसे प्रत्याशी के खर्च का मामला मानता है। उसके आगे उसकी दिलचस्पी नहीं। एक पत्रकार और पाठक के लिए यह साख को बेचने का मामला है। इसलिए पेड न्यूज की तमाम उन शक्लों पर भी विचार करने की ज़रूरत है जो चुनाव की परिधि से बाहर हैं।

     

  • 02/01/2012
    अरविन्द विद्रोही, वरिष्ठ पत्रकार  

    वर्ष २०११ के विदाई और वर्ष २०१२ के आगमन की बेला में सप्ताह भर चले रात के उत्सवो ने जहां लाखो नागरिको को आनंदित कर के ऐश्वर्य के रसा स्वादन का अवसर दिया वही दूसरी तरफ करोडो-करोड़ आम जन ,मेहनत कश तबका पूंजी वाद के, ऐश्वर्य व भोग विलास के इस अदभुत नज़ारे को देख कर ,सुनकर हतप्रभ से है |

  • 21/12/2011
    उमेश चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार

    1999  की तीखी गर्मियों के बीच देश के तमाम नेता आमचुनाव के प्रचार में धूल फांक रहे थे...तब दिल्ली के कांग्रेस मुख्यालय में कपिल सिब्बल ने अपनी पार्टी का पक्ष रखने और तत्कालीन वाजपेयी सरकार की बखिया उधेड़ने की कमान संभाल रखी थी। इन्हीं दिनों बतौर रिपोर्टर उनसे मिलने का मौका मिला

  • 19/12/2011
    शेष नारायण सिंह, वरिष्ठ पत्रकार  

    हिन्दी के नामी कवि और संगीत मर्मज्ञ कुलदीप कुमार को इस साल का मीडिया एक्सीलेंस अवार्ड दिया जाएगा. २१ दिसंबर को मुंबई के एन सी पी ए सभागार में रोल आफ मीडिया इन द प्रमोशन ऑफ़ म्यूजिक इन इण्डिया नाम का  सेमिनार आयोजित किया गया है . इसी अवसर पर इस पुरस्कार को देने का  कार्यक्रम है