टाइम्स ऑफ इंडिया में वह चमकता विज्ञापन
शेष नारायण सिंह, वरिष्ठ पत्रकार
पिछले हफ्ते एक दिन सुबह जब मैंने अखबार उठाया तो टाइम्स आफ इंडिया देख कर चमत्कृत रह गया। अखबार बहुत ही चमकदार था। लगा कि अलमूनियम की शीट पर छाप कर टाइम्स वालों ने अखबार भेजा है। लेकिन यह कमाल पहले पेज पर ही था.समझ में बात आ गयी कि यह तो विज्ञापन वालों का काम है। पहले और आखरी पेज पर एक कार कंपनी के विज्ञापन भी लगे थे। ज़ाहिर है इस काम के लिए टाइम्स आफ इण्डिया ने कंपनी से भारी रक़म ली होगी। टाइम्स में कुछ लोगों से फ़ोन पर बात हुई तो उन्हें छपाई की दुनिया में यह बुलंदी हासिल करने के लिए बधाई दे डाली। उन्होंने कहा कि यह छपाई उनकी नहीं है। बाहर से छपवाया गया है। लेकिन टाइम्स आफ इण्डिया में कोई भी यह बताने को तैयार था कि कहाँ से छपा है। प्रेस में काम करने वाले एक मेरे जिले के साथी ने बताया कि चीन से छपकर आया था वह विज्ञापन..
उसकी बात सुनकर मन फिर उसी कादीपुर और सुलतान पुर वापस चला गया. जहां के हम दोनों रहने वाले हैं . गोमती नदी पर स्थित धोपाप महातीर्थ के उत्तर तरफ उसका गाँव है और दक्षिण तरफ मेरा . मेरा यह दोस्त टी पी पांडे बहुत भला आदमी है . पिछले कई वर्षों से मुझे शराब पीना सिखाने की कोशिश कर रहा है . इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पी एच डी कर रहा था . शोध की कुछ सामग्री जुटाने के लिए बम्बई ( मुम्बई ) गया. चमक दमक में रिसर्च तो भूल गया . भाई ने वहां किसी फ़िल्मी पत्रिका में नौकरी कर ली. फ़िल्मी आकाश पर उन दिनों हेमा मालिनी चमक रही थीं . रेखा के जलवे थे .आदरणीय पांडे जी ने उनके दर्शन किये और मेरा दोस्त वहीं मुंबई का होकर रह गया. धीरे धीरे फ़िल्मी दुनिया की रिपोर्टिंग का दादा बन गया . वहा पत्रिका फिल्म लाइन की सबसे बड़ी पत्रिका है . बाद में उस कंपनी ने उसे पूरी छपाई का इंचार्ज बना दिया . लेकिन उसकी तरक्की से कंपनी के कुछ लोग जल गए और उसे बे इज्ज़त करने की कोशिश शुरू कर दी. मेरे इस दोस्त ने जिस बांकपन से उन लोगों से मुकाबला किया ,उस पर कोई भी मोहित हो जाएगा. मामला रफा दफा हो जाने के बाद एक दिन जब मैं मुंबई गया तो उसने मेरा हाल पूछा . मैंने कहा कि यार किस्मत ऐसी है कि ज़िंदगी भर कभी ऐसी नौकरी नहीं मिली जिस से मन संतुष्ट होता . ठोकर खाते बीत गया. अब फिर नौकरी तलाश रहा हूँ .उसने भी नए सिरे से प्रेस लगाने की अपनी कोशिश का ज़िक्र किया और कहा कि गाँव में लोग साठ साल के उम्र में बच्चों के सहारे मौज करते हैं और हम लोग साठ साल की उम्र में फिर से काम तलाश रहे हैं .
- 17/05/2012
वर्तिका नंदा, मीडिया विश्लेषक.
तस्वीरें काफी तेजी से बदलती हैं। जुलाई 2007 में को मीडिया की सुर्खियां प्रतिभा सिंह पाटिल थीं - देश की पहली महिला राष्ट्रपति, सौम्य, सजग, संवेदनशील वगैरह। उनके लिए वे तमाम विश्लेषण इस्तेमाल किए गए जो किसी की गरिमा को चार चांद लगा सकें।
- 14/05/2012
एनके सिंह, ग्रुप एडिटर, साधना न्यूज
सम्प्रेषण के मूल सिद्धान्तों में जो एक सबसे महत्वपूर्ण सिद्धान्त है वह यह कि सम्प्रेषण तभी कारगर होता है जब लक्षित सामाजिक समूह की चेतना के साथ तादात्म्य बना सकें। अगर संदेश के लिए गलत माध्यम चुना गया या उसकी विषय-वस्तु उसे समाज-समूह की समझ से परे रहा तब संदेश संप्रेषण बेमानी हो जाता है। सरकार की क्षेत्रीय चैनलों को लेकर नई नीति इस दिशा में एक सार्थक प्रयास है। इस नई नीति के तहत भारत सरकार न केवल क्षेत्रीय चैनलों के माध्यम से अपने कार्यक्रमों का विज्ञापन करेगी बल्कि इन चैनलों के रिपोर्टरों को अपने कार्यक्रमों के बारे में बताते हुए इन कार्यक्रमों की मॉनिटरिंग के प्रति भी रुझान पैदा करेगी - 10/05/2012
संजय द्विवेदी, प्रोफेसर, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय
हिंदुस्तान में रहते हुए हम किसी भी इलाके में जाएं उर्दू हमारा साथ नहीं छोड़ती। वह हिंदी की ही तरह राष्ट्रभाषा है, जिसकी जमीन बहुत व्यापक और जड़ें बहुत गहरी हैं। पाकिस्तान के निर्माण ने उर्दू की इस रफ्तार को रोक दिया। उर्दू एक खास तबके की भाषा बनकर रह गयी। वह हिंदुस्तानी जबान से एक कौम की जबान बन गयी या बना दी गयी। ऐसे समय में उर्दू सहाफत (पत्रकारिता) पर बात करना सच में अतीत के उन सुनहरे पन्नों को टटोलने की कोशिश है
- 07/05/2012वर्तिका नन्दावरिष्ठ मीडिया विश्लेषकआमिर के बहाने ही सही, शायद सच को इस बार जीतने में मदद मिल जाए। बरसों पहले रामायण और महाभारत वाले सुबह के स्लाट पर आमिर ने सामाजिक सरोकारों पर कुछ नया करने की कोशिश की। मुबारक आमिर,मुबारक उदय शंकर, मुबारक स्टार।
- 30/04/2012
आनंद प्रधान, एसोसिएट प्रोफेसर, आईआईएमसी
बाबाओं का साम्राज्य सिर्फ धार्मिक चैनलों तक सीमित नहीं है. मनोरंजन चैनलों से लेकर न्यूज चैनलों तक पर भी सुबह की कल्पना उनके बिना संभव नहीं है. इन बाबाओं/बापूओं/स्वामियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि धर्म और ईश्वर भक्ति से उनका बहुत कम लेना-देना है.


