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आखिर इतने सस्ते में कैसे बिक रहा है देशी घी

Monday, 06 August, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

हम सभी लोगों के मन में यह प्रश्न जरूर कौंधता होगा कि आखिर देशी घी बाजार में इतना सस्ता कैसे बिक रहा है? लेकिन उससे पहले ये जानना बहुत जरूरी है कि देशी घी आखिर है क्या? देशी घी का मतलब सिर्फ मिल्क फैट से होता है। इसके लिए बाकायदा फूड सेफ्टी एण्ड स्टैण्डर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (फसाई) ने निर्धारित मानक तय कर रखे हैं। किसी भी मिल्क फैट में वेजिटेवल फैट अथवा एनिमल फैट नहीं मिलाया जा सकता है जबकि ज्यादातर इन्हीं चीजों का प्रयोग देशी घी के बनाने में प्रयुक्त हो रहा है।

इस बात के सत्यापन के लिए कुछ तथ्यों पर विचार करना अति आवश्यक है कि वेजिटेवल फैट जिसे पाम ऑयल या वेजिटेवल ऑयल कहा जाता है, उसकी मार्केट में कीमत करीब 50 रुपए प्रति लीटर से शुरू होकर 150 रुपए प्रति लीटर तक है। यानि हम 60 प्रतिशत मिल्क फैट में 40 प्रतिशत वेजिटेवल फैट को गरम करते समय मिला लें तो देशी घी की यह मिलावट लैबोरेट्री में आसानी से पकड़ में नहीं आएगी और इस प्रकार जो सस्ता देशी घी हमारे द्वारा बाजार से लिया गया उसमें मिल्क फैट के साथ वेजिटेवल फैट का प्रयोग जानकारी के अभाव में हर घर में किया जा रहा है।

गौरतलब है कि यदि किसान अपने घर में जमाए हुए दही से मट्ठे को खुद के काम में ले ले और इस तरीके से भी निकाले हुए घी को 400 रुपए प्रति लीटर में बेचे तो किसान को गाय के दूध के फैट की कीमत 16 रुपए प्रति लीटर व भैंस के दूध के फैट की कीमत 20 रुपए प्रति लीटर मिलेगी। मट्ठे का पैसा किसान को नहीं मिलेगा जबकि वर्तमान में देशी गाय के दूध की कीमत कम से कम 30 रुपए प्रति लीटर और भैंस के दूध की कीमत  40 रुपए प्रति लीटर है।


अब सोचने वाली बात ये है कि जो घी किसान बेचता है या उसे डेयरी फैक्ट्री तैयार करती है, पैकिंग कराती है और जी.एस.टी. देती है, ट्रांसपोर्ट देती है, डीलर का नफा रखती है तो केवल मिल्क फैट ही 600 रुपए से कम नहीं पड़ सकता। 

देशी गाय के ए2 दूध से देशी घी बनाकर 800 रुपए प्रति लीटर विक्रय करने वाले गव्यामृत के एमडी मनीष अग्रवाल का कहना है कि वे खुद हैरत में है कि लोग किस तरह से देशी घी को 400 रुपए लीटर तक में बेच रहे हैं। उनका दावा है कि इतने सस्ते में शुद्ध देशी घी लोगों को मिलना मुश्किल ही नही, नामुमकिन है।

इन मामलों के विशेषज्ञ डॉ. विपिन अग्रवाल भी स्पष्ट कहते हैं कि उनके द्वारा किए गए अनेक परीक्षणों में विभिन्न कंपनियों का 75 प्रतिशत देशी घी शुद्धता के मानकों पर खरा नहीं उतरा है, जिसके लिए कई प्रतिष्ठित ब्रैंड पर लोगों के द्वारा बाकायदा मुकदमे भी दर्ज कराए गए हैं। डॉ. अग्रवाल मानते हैं कि सरकार को भी इतने सस्ते में देशी घी बेचने वालों पर नजर रखकर उनसे स्पष्टीकरण मांगना चाहिए कि आखिर वह अपना कितना मार्जिन रखकर और किस तरह से देशी घी मार्केट में उपलब्ध करा रहे हैं।

बात कुछ भी हो पर देशी घी के उत्पादन को लेकर यह संशय अब निरंतर गहराता जा रहा है और लोगों में जागरूकता की कमी की वजह से अभी यह तथ्य लोगों के सामने नहीं आ पाए हैं।



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