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पीरियड्स के दिनों में महिलाओं की एक्टिविटी को लेकर हुआ सर्वे ये कहता है...

Monday, 11 June, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

महिलाओं में मासिक धर्म एक प्राकृतिक शारीरिक प्रकिया है। भारत में आज भी 'माहवारी' (पीरियड्स) शब्द को शर्म और गंदगी से जोड़कर देखा जाता है। शहर हो या गांव आज भी इस विषय पर हर जगह एक चुप्पी का माहौल रहता है। आज भी बदलते इस परिवेश में माहवारी शब्द हमारे जीवन के शब्दकोष का एक सहज हिस्सा नहीं बन पाया हैं। महिला के उन पांच दिनों से जुड़ी उसकी असहजता और तकलीफ पर कहीं कोई चर्चा नहीं होती। लेकिन हाल ही में हुए एक सर्वे में इस पर खुलकर चर्चा की गई है।

दरअसल, देश में 60 प्रतिशत क्रियाशील महिलाएं मासिक धर्म के दौरान तैराकीयोगनृत्यकलाजिम इत्यादि कार्यकलाप नहीं कर पातीं है येह खुलासा हुआ है फेमिनिन हाइजीन प्रॉडक्ट्स ब्रैंड एवेरटीन के तीसरे मेन्स्त्रुअल हाइजीन सर्वे मेंजिसमें देश के 85 शहरों से 2000 से ज्यादा महिलाओं में हिस्सा लिया।

लगभग आधी कामकाजी महिलाओं (49 प्रतिशत) ने कहा की माहवारी के दौरान वे काम पर ध्यान नहीं दे पातींजबकि 58 प्रतिशत महिलाओं का कहना है की पीरियड्स उनकी कार्य क्षमता पर कुछ असर डालते हैं। 8 प्रतिशत महिलाओं ने तो यहां तक माना की पीरियड्स की वजह से उन्हें दफ्तर में काम ठीक से ना करने की वजह से आलोचना भी झेलनी पड़ी।

एवेरटीन मेनस्ट्रउअल सर्वे 2018 में यह भी सामने आया की भारत में 46 प्रतिशत महिलाएं मासिक धर्म के दौरान काम से अनुपस्थित रहती हैं।

जहां एक और सेनेटरी प्रोडक्ट चुनते हुए सुविधा 52.1 प्रतिशत पर सबसे बड़े प्रमुख कारण के रूप में उभरावहीँ सर्वेक्षण में यह भी दिखा की 83 प्रतिशत महिलाएं पीरियड्स को सुखदायी बनाने के लिए नए प्रोडक्ट्स को नहीं खोज रहीं हैं। फलस्वरूप 92 प्रतिशत महिलाएं अभी भी सेनेटरी नैपकिन से ही काम चला रही हैंऔर 70 फीसदी महिलाओं के मन की शांति पीरियड्स में भंग हो जाती है।

66 प्रतिशत ने तो यह भी कहा की उन्हें पीरियड्स में डिप्रेशन होने लगता है। वहीं एक तिहाई महिलाओं ने माना की मासिक धर्म होने पर वो बाहर आने जाने वाले काम जैसे पार्टीपारिवारिक समारोह या डेट पे जाने में संकोच महसूस करती हैं। 79 प्रतिशत महिलाओं ने माना की पीरियड्स के दौरान उनके कपडे पहनने के स्वभाव में परिवर्तन आ जाता है और उन्हें यह चिंता रहती है कि क्या पहने और क्या नहीं।

वेट एंड ड्राई पर्सनल केयर के प्रमुख हरिओम त्यागी ने बताया की ऐसा इसलिए है कि अधिकतर भारतीय महिलाएं अभी भी नवीनतम मेनस्ट्रयूअल प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल नहीं कर रही हैं। सर्वेक्षण में पाया गया की केवल 7 प्रतिशत शहरी महिलाएं ही टैम्पोंस और मेनस्ट्रयूअल कप्स प्रयोग करती हैं। 75 प्रतिशत महिलाओं को तो यह जानकारी भी नहीं थी की अमेरिका और इंग्लैंड जैसे विकसित देशों में टैम्पोंस महिलाओं की पहली पसंद हैं।

जानकारी के इस अभाव की वजह से महिलाओं को माहवारी में काफी दिक्कत झेलनी पड़ती है। सर्वे में पाया गया की लगभग 49 प्रतिशत महिलाओं को साल में एक से ज्यादा बार पीरियड्स के दौरान किसी न किसी स्त्रीरोग का शिकार होना पड़ा, इनमें से 42 प्रतिशत महिलाओं को तो साल में तीन से ज्यादा बार योनी संक्रमण की समस्या रहती है।

एवेरटीन भारत में सेनेटरी उत्पादों का एक बड़ा ब्रैंड है। इसके प्रॉडक्ट्स में टैम्पोंसमेनस्ट्रयूअल कप्ससेनेटरी नैपकिन पैड्सइंटिमेट वाइप्सफेमिनिन इंटिमेट वाशडेली पैंटीलाइनर्सबिकिनी लाइन हेयर रेमूवर क्रीमऔर वैजायिनल टाइटनिंग जेल शामिल हैं। एवेरटीन मेनस्ट्रउअल सर्वे 2018 मासिक धर्म सम्बन्धी जानकारी मुहैया कराने के लिए तीसरा सर्वे है।



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