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IRS 2017: इस वजह से दो बड़े अखबारों के खिलाफ चल रही है जांच

Published At: Thursday, 01 February, 2018 Last Modified: Tuesday, 07 August, 2018

" class="undefined">नाजिया अल्‍वी रहमान ।।


इंडियन री‍डरशिप सर्वे’ (IRS) 2017 के आंकड़े जारी हुए लगभग दो हफ्ते बीत चुके हैं, ऐसे में मीडिया रिसर्च यूजर काउंसिल (एमआरयूसी) कुछ प्रकाशनों द्वारा आंकड़ों के दुरुपयोग किए जा रहे मामलों पर नजर रख रही है। इंडस्‍ट्री से जुड़े कुछ उच्‍च पदस्‍थ सूत्रों की मानें तो काउंसिल को इन आंकड़ों के अनुचित इस्‍तेमाल की तमाम औपचारिक शिकायतें प्राप्‍त हुई हैं। जबकि दो मामले तो जांच कमेटी के पास पहले ही भेजे जा चुके हैं।


सूत्रों का यह भी कहना है कि इस बार आचार संहिता के बावजूद अधिकांश पब्लिकेशंस ने इन आंकड़ों का इस्‍तेमाल अपने मार्केटिंग उद्देश्‍यों को पूरा करने के लिए मनमाने ढंग से किया। इस बारे में ‘एमआरयूसी’ के चेयरमैन आशीष भसीन का कहना है, ‘कुछ पब्लिकेशंस द्वारा मेलर्स अथवा विज्ञापनों में इस्‍तेमाल किए गए आंकड़ों की जांच की जा रही है। हालांकि अभी किसी के भी खिलाफ औपचारिक रूप से कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।’


भसीन ने कहा, ‘यह काफी लंबी प्रक्रिया है। हमारी कमेटी इन मामलों की जांच कर रही है। कमेटी द्वारा आंकड़ों और पब्लिकेशंस द्वारा किए गए दावों की पुष्टि की जा रही है। यदि जांच में पता लगता है कि नियमों का उल्‍लंघन कर आंकड़़ों का दुरुपयोग हुआ है तो हम ऐसे पब्लिकेशंस के खिलाफ नोटिस जारी करेंगे। नियमों का उल्‍लंघन करने पर किसी को भी बख्‍शा नहीं जाएगा। इसके अलावा नॉन सब‍स्‍क्राइबर्स द्वारा आईआरएस के आंकड़ों का इस्‍तेमाल करने पर भी सख्‍ती दिखाई जाएगी और ऐसे लोगों से सख्‍ती से निपटा जाएगा। आंकड़ों की पाइरेसी को किसी भी हाल में बर्दाश्‍त नहीं किया जाएगा।’


गौरतलब है कि एमआरयूसी ने आईआरएस 2017 के आंकड़ों के लिए पहली बार आचार संहिता लागू की है। इस आचार संहिता के अनुसार, ‘सबस्‍क्राइबर इस साल के आईआरएस के आंकड़ों की तुलना पिछले किसी भी आईआरएस राउंड से नहीं कर सकता है।


इस आचार संहिता में कहा गया है कि नंबर वन होने का दावा या सबसे आगे होने का दावा किसी भी तुलना के आधार पर नहीं किया जा सकता है। किसी भी पब्लिकेशन/रेडियो स्‍टेशन/टीवी चैनल द्वारा रीडरशिप/लिशनरशिप/व्‍युअरशिप के आंकड़े सिर्फ आईआरएस 2017 के मान्‍य होंगे। इसके अलावा यह शर्त भी रखी गई है कि सबस्‍क्राइर को पूरे सर्वे की सभी शर्तों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। हालांकि आंकड़ों के जारी होने के तुरंत बाद ही वर्चस्‍व की लड़़ाई शुरू हो गई थी। ऐसे में अधिकांश पब्लिकेशंस ने विभिन्‍न विज्ञापनों के द्वारा तुलनात्‍मक रणनीति का इस्‍तेमाल शुरू कर दिया था।

(इनपुट्स: निशांत सक्सेना)


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