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क्या 'मानसून' से मीडिया के विज्ञापनों की कमाई होती है प्रभावित?

Tuesday, 26 June, 2018

सोनम सैनी।।

मानसून में ब्रैंड्स के लिए आउट ऑफ होम (OOH) एडवर्टाइजिंग में निवेश करना सामान्‍यत: सही समय नहीं होता है। खासकर मुंबई जैसे शहरों में जहां पर बारिश से शहर बुरी तरह प्रभावित होता है। कई जगह होर्डिंग्‍स गिर जाते हैं और बारिश के दौरान दृश्‍यता कम होने के कारण सड़कों के किनारे लगे होर्डिंग्‍स ठीक से दिखाई भी नहीं देते हैं। ऐसे में ब्रैंड्स के लिए आउटडोर विज्ञापन बारिश में कम पसंदीदा विकल्‍प होते हैं।

इंडस्‍ट्री पर मौसम की मार के अलावा ये दो महीने ओओएच प्‍लेयर्स के लिए रेवेन्‍यू के हिसाब से भी सही नहीं होते हैं। इन दो महीनों में रेवेन्‍यू में काफी कमी आ जाती है। मीडिया बॉयर्स का कहना है कि इस कारण अधिकांश फास्‍ट मूविंग कंज्‍यूमर गुड्स (FMCG) और कंज्‍यूमर ड्यूरेबल ब्रैंड्स अपने बजट को त्‍योहारी सीजन के लिए बचाकर रखते हैं। अभी तक के परिदृश्य को देखते हुए बिजनेस में 15 से 20 प्रतिशत की कमी होने की आशंका है।


पोस्‍टरस्‍कोप एशिया पैसिफिक (Posterscope Asia Pacific) के रीजनल डायरेक्‍टर और पोस्‍टरस्‍कोप ग्रुप इंडिया (Posterscope Group India) के एमडी हरीश नायक का मानना है कि मानसून से बिजनेस प्रभावित होता है। उनका कहना है कि सिर्फ आउट ऑफ होम ही नहीं बल्कि बिजनेस के अन्‍य माध्‍यम भी मानसून से प्रभावित होते हैं।


हरीश नायक के अनुसार, 'टेलिविजन और प्रिंट के विज्ञापन भी मानसून की बजाय त्‍योहारी सीजन में ज्‍यादा नजर आते हैं। हालांकि बिजनेस में 15 से 20 प्रतिशत की कमी हो सकती है लेकिन यह कोई ज्‍यादा बड़ी गिरावट नहीं है।उनका कहना है कि मौसम की मार से बचने के लिए क्‍लाइंट्स रोड साइड के किनारों वाले विज्ञापनों की बजाय मॉलमल्‍टीप्‍लेक्‍स और कॉरपोरेट पार्क आदि में आउटडोर विज्ञापनों को प्राथमिकता देते हुए वहां निवेश करने लगते हैं।


उनका कहना है, 'जैसे-जैसे मानसून शुरू होता हैयह निवेश रोडसाइड के किनारों के बजाय दूसरी तरह के आउटडोर विज्ञापनों की ओर रुख करने लगता है। ये विज्ञापन कॉफी शॉप और मॉल्‍स में लगने लगते हैं। कहने का मतलब है कि मानसून के दौरान भी आउटडोर एडवर्टाइजिंग चलती रहती है। हालांकि इसके स्‍वरूप में थोड़ा सा बदलाव जरूर आ जाता है।'


एक अन्‍य मीडिया प्‍लानर ने भी नायक की बात से सहमति जताते हुए कहा, 'भारत में मानसून काफी तेज होता हैजिससे आउटडोर एडवर्टाइजिंग में कमी आ जाती है। ऐसे में बिजनेस गणपति महोत्‍सव के आसपास दोबारा से तेजी पकड़ता हैजब त्‍योहारी सीजन की शुरुआत होती है।उनका कहना है, 'मानसून के दौरान बिजनेस में मंदी आ जाती है और यह स्थिति हम कई वर्षों से देख रहे हैं। मानसून में बिजनेस में करीब 20-25 प्रतिशत तक की कमी आ जाती हैजो शहरों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। हर साल यही होता है कि मानसून में बिजनेस कम हो जाता है और त्‍योहारी सीजन में उठ जाता है। पिछले साल के मुकाबले इस बार आउटडोर एडवर्टाइजिंग काफी अच्‍छा काम कर रहा है। इसमें 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्‍मीद हैइस प्रकार इस साल यह ग्रोथ दोहरे अंकों में होगी।'


हालांकिसभी लोग इस बात से सहमत नहीं हैं कि मानसून बिजनेस को प्रभावित करेगा।


'Graphisads' के डायरेक्‍टर आलोक गुप्‍ता का कहना है, 'इस तरह के प्रभाव के बारे में कहना सही नहीं है। क्‍योंकि आउटडोर बिजनेस एक तरह से चक्रीय व्‍यवस्‍था में चलता है इसलिए जून-जुलाई में यह मानसून की वजह से कम नहीं होता बल्कि मार्केट के अनुसार बदलता है। यह समय चूंकि शैक्षिक सत्र का भी होता हैइसलिए हम इन दिनों में शैक्षिक योजनाओं पर खर्च को देखते हुए भी चलते हैं। अधिकांश फास्‍ट मूविंग कंज्‍यूमर गुड्स (FMCG) और कंज्‍यूमर ड्यूरेबल ब्रैंड्स अपने बजट को बचाकर रख लेते हैं और त्‍योहारी सीजन में खर्च करते हैं। ऐसे में मानसून आउटडोर बिजनेस को ज्‍यादा प्रभावित नहीं करता है।'


ऐसे में यह पूछे जाने पर कि मानसून के दौरान किस खास कैटेगरी के क्‍लाइंट्स एडवर्टाइजिंग पर ज्‍यादा खर्च करते हैं, 'जेसीडीकॉक्स इंडिया' (JCDecaux India) के एग्जिक्‍यूटिव चेयरमैन प्रमोद भंडूला ने कहा, 'किसी समय में टायर ब्रैंड्स मानसून के दौरान विज्ञापन पर काफी खर्चा करते थे लेकिन अब इस तरह के विज्ञापन मुश्किल से ही दिखाई देते हैं।'


मानसून के दौरान बिजनेस के बारे में उन्‍होंने कहा, 'भारत में सिर्फ मुंबई के मार्केट पर मानसून का प्रभाव पड़ता है। बाकी मार्केट पहले की तरह काम करते रहते हैं। मुंबई का काफी मार्केट दो महीने के लिए प्रभावित होता है लेकिन यह भी बहुत ज्‍यादा प्रभावित नहीं होता है।'

 

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