हिंदी है जन-जन की आशा

हिंदी है जन-जन की आशा

Thursday, 14 September, 2017

monika

मोनिका सेठ

दयालबाग, आगरा ।।


हिंदी दिवस के उपलक्ष्य पर हमारी एक पाठिका ने हिंदी को लेकर अपनी भावनाओं को कुछ यूं पेश किया है। हम उनकी ये कविता आपके लिए पेश कर रहे है। मोनिका सेठ ने मातृभाषा हिंदी को कविता, शायरी, अभिव्यक्ति, स्वाभिमान, स्वतन्त्रता आन्दोलन, राष्ट्रीय एकता, क्रान्ति, विज्ञान कला शब्दों, वर्णों और छंदों की भाषा बताया है...

अनंत धरोहर है असीम इसकी प्रस्तुति

अनुपम है इसका स्वर।

हिंदी बहता नीर है

धीर, वीर, गम्भीर है

नहीं है यह मात्र एक भाषा

हिंदी है जन-जन की आशा।

भाषा नहीं भावना है यह अभिव्यक्ति का है आसमान

परिवर्तन की चिर शक्ति इसमें यह है देशों का स्वाभिमान।

हिंदी है विज्ञान की भाषा कला और ज्ञान की भाषा

जन-जन के उत्थान की भाषा गौरव और सम्मान की भाषा।

 

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