साक्षात्कार

मैं जो हूं, ऑन एयर भी वही रहता हूं

nitin-rj.jpg
प्रसिद्ध रेडियो जोकी जोनाथन नितिन ब्रेडी उर्फ खुराफाती नितिन उर्फ उल्टा-पुल्टा नितिन, उन्होंने अपनी बचकाना हरकतों और अनोखे अंदाज से पूरे दिल्लीवासियों का दिल जीत लिया है। लेकिन वे यह सोचते हैं कि वे गलत जॉब कर रहे हैं। विलेन बनने में दिलचस्पी रखने वाले नितिन को स्कूल से लेकर कॅरियर तक उनके चाहने वाले उन्हें एक कॉमिक आर्टिस्ट के रूप में देखना चाहते थे। इस समय वे रेड एफएम 93.5 के मार्निगं नंबर वन शो को होस्ट कर रहे हैं। अपने कॅरियर के शुरुआती दो वर्ष तक नितिन ने ऑल इंडिया रेडियो में भी काम किया। इस जॉब के साथ ही वे जैज डांस के इंस्ट्रक्टर भी रहे हैं। इन सब के बाद में रेडियो मिर्ची में एक नये अवतार उल्टा-पुल्टा नितिन के रूप में श्रोताओं से रुबरू हुए। मिर्ची में चार साल काम करने के बाद उन्होंने रेड एफएम ज्वाइन कर लिया। समाचार4मीडिया की संवाददाता सुप्रिया अवस्थी से हुई नितिन की बातचीत के कुछ अंश...
 
नितिन के भीतर ऐसी कौन सी खासियत है जो उन्हें एक लोकप्रिय रेडियो जॉकी बनाती है?
क्या मैं लोकप्रिय हूं? मुझे समझ में नहीं आता है कि आपको लोकप्रिय होने की क्या जरूरत है? हां, जब मेरे श्रोता कहते हैं कि वे मुझे पंसद करते हैं, क्योकि वो मेरे साथ एक परिवार जैसा महसूस करते हैं  तो मुझे खुशी होती है। मैं जो हूं, ऑन एअर भी वही रहता हूं, मैं अपने शो में कोई एक्ट नहीं करता हूं और मैं चाहता हूं कि मैं अपने फ्रेंड्स जैसे श्रोताओं के साथ हमेशा जुड़ा रहूं।
 
अपने मॉर्निंग शो को नबंर एक बनाने के लिए आप हर सुबह इतनी एनर्जी और उत्साह कहां से लाते हैं?
सबसे पहली प्रेरणा मुझे तब मिलती है जब मुझे हर महीने मेरी सैलरी का चेक मुझे दिया जाता है। (इट्स जोकिंग...) जब मेरे श्रोता मुझसे कहते है कि वो मुझे प्यार करते हैं और वे मुझे प्रत्येक सुबह सुनते हैं तो यह मुझे सबसे ज्यादा उत्साहित करता है।
लेकिन सबसे ज्यादा आपको एनर्जी और गर्व तब होता है जब आपके काम के लिए आपको सम्मानित किया जाता है मेरे लिए भी सबसे ज्यादा खुशी का मौका तब था जब मुझे आरएपीए अवार्ड, द प्रोमेक्स अवार्ड और जल्द ही दिया गये द मीडिया फेडेरेशन ऑफ इंडियन अवार्ड से द मोस्ट इंफोटेनिंग रेडियो जॉकी ऑफ इंडिया ऑफ ईयर से नवाजा गया।
 
आपने फिल्मों और विज्ञापनों में वायस ओवर दिया है? यह रेडियो जॉकिंग से कैसे अलग या समान है
रेडियो जोकिंग और वायस ओवर में जमीन-आसमान का अंतर होता है। वायस ओवर के लिए आपको एक स्क्रिप्ट मिलती है, आपको बताया जाता है कि यह आपको किस मूड और आवाज में बोलना और उसके बाद भी इसके साथ कई प्रयोग किए जाते हैं। जबकि रेडियो में सब कुछ रीयल होता है वहां पर न कोई रीटेक होता है, न कोई सेंकेंड चांस। रेडियो जॉकी कलाकारी नहीं करता है, वह जो करता है दिल से करता है। जहां पर सिर्फ रेडियो जॉकी और रेडियो स्टेशन के विचार होते हैं।
 
आप अपने स्पेक्ट्रम से श्रोताओं को कैसे जोड़ते हैं?
मैं तो बस यही कोशिश करता हूं कि ज्यादा से ज्यादा सूचना देकर अपने श्रोताओं को रोक सकूं। इसके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि आपके श्रोता हर सुबह क्या सोचते हैं और वो रेडियो स्टेशन ऑन करते ही क्या सुनना चाहते हैं, इसलिए मैं हर सुबह 8 न्यूज पेपर स्कैन करके आता हूं जिसमें अधिकांश खबरें दिल्ली की होती हैं और सोशल नेटवर्किंग साइट्स जैसे फेसबुक और ट्विटर को देखकर आता हूं, क्योंकि आजकल तो इंटरनेट का जमाना है। खबरे सोशल नेटवर्किंग साइट पर पहले आती हैं अखबारों और न्यूज चैनल में बाद में ही आती है। मैं अपने श्रोताओं की हर नब्ज को पकड़ कर फील करना चाहता हूं। इसके बाद मैं माइक पर जाता हूं और धूम मचा देता हूं। मैं अपने श्रोताओं से ऐसे बात करता हूं जैसे मैं उनका बेस्ट फ्रेंड हूं।
 
एक रेडियो जॉकी के लिए क्या चुनौतियां होती है? जॉब में सबसे रोमांचक पहलू क्या होते हैं?
मैं दूसरे जॉक्स के बारे में तो नहीं जातना हूं, लेकिन मैं सोचता हूं कि मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती रोज सुबह 4 बजे जागना है। सर्दी, बारिस, कोहरा, गर्मी, चाहे साल का कोई भी मौसम हो, मेरे लिए कुछ भी मायने नहीं रखता है। ऐसा कोई भी दिन नहीं होता है जब मैं यह कह सकूं कि ओके आज मैं काम पर जाने में थोड़ा लेट हो जाउंगा। इसके अलावा सबसे बड़ी चुनौती तब आती है जब आपका दिन खराब हो। लेकिन हमें ऐसे विहैव करना होता है कि दुनिया को पता ही न चले कि हमारा मूड अपसेट है। यह कई बार मुश्किल पैदा करता है। सबसे रोमांचक पल वो होता है जब मैं रोज ढेर सारे लोगों से बाते करता हूं, जिनमें से अधिकांश लोग पूरी दुनिया के प्रश्नों के उत्तर देने के लिए तैयार और तत्पर होते हैं।
 
रेडियो और आरजेईंग पहले से अब में क्या बदलाव आये हैं ?
रेडियो जॉकिंग में वास्तव में बहुत बदलाव आया है। इस बात से कोई सरोकार नहीं है कि पहले रेडियो जॉकी कैसे प्रेजेंटेशन देते थे। आजकल रेडियो जॉकर्स के पास जॉक टॉक के लिए समय बहुत सीमित होता है। पहले के समय में रेडियो जॉकी के लिए बात करते के लिए बहुत समय होता था। आजकल रेडियो स्टेशन श्रोताओं को कंटेंट में वैरायटी देने की समस्या को झेल रहे हैं और अभी भी जॉक की बात को कम से कम करने के लिए ही कहा जाता है। रेडियो जॉकी को जल्दी सोचने और बीच में जोक करने की आवश्यकता होती है और साथ ही अपनी बोली पर नियंत्रण रखना होता होता है। कुछ दिग्गजों का तर्क है कि, ‘क्योंकि लिंक अवधि पर निरंतर बहुत दबाव पड़ रहा है, जिसके कारण रेडियो अपना सार खो सकता है। ’ लेकिन इन सब बातों से मैं सहमत नहीं हूं। मैं सोचता हूं कि रेडियो बहुत ही डाइनैमिक है। यह बहुत ही जोशीला, एनर्जेटिक और मनोरंजक साधन है।   
 
आप परेशान करने वाले कॉलर्स को कैसे संभालते हैं?
मुझे बहुत ज्यादा परेशान करने वाले कॉलर्स का सामना नहीं करना पड़ा है। और अगर कभी कोई इस मूड से मुझे कॉल करता है तो मैं उसे खुश करने की पूरी कोशिश करता हूं।
 
अगर किसी और फील्ड में मौका मिले तो आप कहां जाना चाहेंगे ?
मैं वॉलीबुड का खलनायक बनना चाहता हूं। मैं यह आशा करता हूं कि कोई निर्माता इसे पढ़ ले और मुझे ऑडिशन के लिए बुलाये।
 
आपकी सफलता का मंत्र क्या है?
मैं कर सकता हूं, मैं करना चाहता हूं, मैं करूंगा। यही मेरी फिलॉसफी है।
 
नोट: समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडिया पोर्टल एक्सचेंज4मीडिया का नया उपक्रम है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें samachar4media@exchange4media.com पर भेज सकते हैं या 09999064949 / 09818848564 पर संपर्क कर सकते हैं।
  • 21/08/2010
    अनुषा रिज़वी, पत्रकार व फिल्म निर्देशिका
    भारतीय मीडिया के संवेदनहीन कैमरे से किसानों की खुदकुशी जैसी गंभीर समस्या को व्यंग्यात्मक शैली में दिखाकर ‘पीपली लाइव’ की निर्देशिका अनुषा रिज़वी ने पहली ही फिल्म से अपनी अलग पहचान गढ़ ली है। पत्रकारिता और फिल्म बनाने के अपने पहले अनुभव से लेकर तमाम दूसरे पहलुओं पर अनुषा रिज़वी से समाचार4मीडिया की खास बातचीत
  • 26/07/2010
    रजत शर्मा, चेयरमैन, इंडिया टीवी
    यह जनता की ही अदालत है और मैं जनता का ही वकील हूं. आपने देखा होगा कि मैं जो सवाल करता हूं वह एक संपादक की तरह या पत्रकार की तरह नहीं, बल्कि एक आम आदमी की तरह
    आपकी अदालत के सत्रह साल पूरे होने पर रजत शर्मा से समाचार4मीडिया की विशेष बातचीत
  • 08/07/2010

    राजीव वर्मा, सीईओ, एचटी मीडिया

    टीवी की दुनिया बहुत सीमित है और इसको बहुत कॉनसोलिडेशन की जरूरत है। और मुझे निकट भविष्य में ऐसा कुछ होता हुआ नहीं दिखाई दे रहा है। प्रिंट की दुनिया में अभी भी बहुत संभावनाए हैं
  • 28/06/2010

    विनोद कापड़ी, मैनेजिंग एडिटर, इंडिया टीवी         इंडिया टीवी की खासियत यह है कि वह खबरों को सबसे पहले समझ लेता है, लोग उसके बाद हमें फॉलो करते हैं। हमारी पहचान इसलिए है क्योंकि हम आम जनता से जुड़ी खबरें दिखाते हैं अपने सुख के लिए पंचायत नहीं बिठाते।

  • 17/06/2010

    उदय शंकर, सीईओ, स्टार इंडिया            सच कहूं, तो मैं कंपिटीटर की ओर नहीं देखता। बहुत पहले मुझसे किसी ने कहा था कि जब आप रेस लगा रहे हों तो बगल वाली लेन में यह मत देखो कि आप के बराबर में कौन दौड़ रहा है क्योंकि यह आपको डाइवर्ट कर सकता है।